किसी को कुछ आता नहीं,
फिर भी वो माहिर बने रहने के आसार में है।
जिसे तुम नहीं सुनना चाहते,
उसे सुनने को लोग लाखो की कतार में है।।
कोन चाहता है बहरे लोगो के सामने लब्ज बयां करना,
हम तो लोगो की फरमाइश पर निकालते है आवाज़।
वरना हमारी खामोशी ही काफी है किसीको समझाने में,
हमें बोलने की जरूरत नहीं क्योंकि हमारे शब्द ही मिल जाते है लोगो की आवाजों में ।।
एन आर ओमप्रकाश।