मानवता हित रूप धरा प्रभु ने,
तुम भी कुछ उपकार करो ।
हरो वेदना दीन दुखी की
,सबका तुम सम्मान करो।
भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचे,
तुम उसका प्रतिकार करो ।
मानवता है रुप दया का
नहीं किसी का उपहास करो ।
अपमान अगर अबला का हो,
उसे अमर्ष निस्सार करो।
बदला समय विचार बदल गए
अपनीसंस्कृति का मान करो ।
बुन जाए जातियता जाल,
निमेष उसे निरूवार करो ।
राम राज्य फिर आ जाएगा ,
लक्ष्यों को अंगीकार करो ।
भारत भूमि का हो उत्थान ,
तुम संकल्प महान करो।।
तारा गुप्ता