नाम मेरा *बुलबुल* है,
खुद से खुद कि पहचान बनाई है।
अरमानों के पंख लिये स्वप्न लोकि आकाश में
उङान लगाई है।।
शून्य कहते थे मुझे, आज कुछ संख्याओं को
शून्य से जोड़ा है :
इस शून्य से संख्याएँ और जूङेगीं,
मेरे पंखों को हौंसले, उम्मीदें और मिलेगी।
भले ही रूपये नहीं मुझे लिखने के पर
नाम रूपी धन जरूर कमाया है।।
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