??લાજવાબ??
? *गजल* ?
गीता से और क़ुरान से आगे निकल गए,
मज़हब की हर दुकान से आगे निकल गए.
सर को ऊठा के शान से! आगे निकल गए,
खुद को बचाके ! ध्यान से आगे निकल गए.
चौखट पे उनकी एक दो पल जो रुके रहे,
उस पल में हम अजान से आगे निकल गए.
जिसने भी जा के थाम लिया हाथ ईश्क का,
वो सब पूरे जहान से आगे निकल गए.
रुह पर लगी जो चोट तो कहकर गजल मनोज,
सब खोखले बयान से आगे निकल गए.
~ डॉ. मनोज जोशी 'मन'
( जामनगर)