परख - लघुकथा - ---
नीना जैसे ही चाय की ट्रे लेकर, उसे देखने आये लड़के वालों के परिवार की एक मात्र महिला को चाय देने बढ़ी, उस महिला को देख कर नीना के होश उड़ गये। उसे लगा वह अभी चक्कर खा कर गिर जायेगी। अब उसे निश्चित लग रहा था कि यह रिश्ता भी नहीं होने वाला। माँ बापू को आज फिर तगड़ा झटका लगेगा।
हालांकि नीना एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर थी। बस खूबसूरती में औसत थी। रंग भी थोड़ा दबा हुआ था। अतः रिश्ते होते होते रह जाते थे।
नीना के सामने कालेज की वह घटना चल चित्र की तरह घूम गयी। जब वह इंजीनियरिंग कालेज की गर्ल्स हॉस्टल में थी। यही महिला वहाँ वार्डन थी। एक शाम हॉस्टल में हंगामा हो गया कि एक लड़का हॉस्टल में घुसते देखा है। वार्डन ने सिक्योरिटी बुला ली। तलाशी अभियान शुरू। मेरे कमरे का द्वार खुला था। मैं पढ़ रही थी। वार्डन अंदर आयीं तो वह लड़का मेरे बाथ रूम में मिला। वार्डन मैडम तो मुझे खा जाने वाली निगाहों से घूर रही थीं। पता नहीं क्या क्या अंट शंट बोले जा रही थीं।
मामला प्रिंसीपल के पास चला गया। मैंने प्रिंसीपल को स्पष्ट बताया कि मैं इस लड़के को नहीं जानती। उस लड़के ने भी कहा कि मुझे जिस लड़की ने बुलाया था वह यह नहीं है। उस लड़की का कमरा नंबर भूल गया। इतने में हो हल्ला होने लगा। इसके कमरे का दरवाज़ा खुला देखा तो डर कर उसमें घुस गया। उस लड़के ने यह भी बताया कि उस लड़की ने मुझे हॉस्टल में घुसने का सही वक्त शाम को सात से आठ के बीच बताया क्योंकि उस समय दरबान वार्डन के रूम पर खाना बनाने जाता है। प्रिंसीपल मैम के पूछने पर मैंने भी इस बात की पुष्टि की।
वार्डन को पद से हटा दिया। उस लड़के को पुलिस को दे दिया।
सब लोग चाय पीने में व्यस्त थे लेकिन नीना के मन में द्वंद चल रहा था। वह उस घड़ी की कल्पना करके चिंतित थी जब वे लोग इस रिश्ते को ठुकरा कर जायेंगे तो माँ बापू को कैसे आश्वस्त करेगी। उसे यह भी डर था कि कहीं उस हॉस्टल वाली घटना का जिक्र माँ बापू से ना कर दें| नीना इन्हीं अनगिनत सवालों में उलझी हुई थी|
नीना की तंद्रा तब भंग हुई जब उसकी माँ ने उसे कहा,"नीना अपनी होने वाली सासू माँ के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लो। इन्हें रिश्ता मंज़ूर है।"
मौलिक लघुकथा