"कविता - - - -" कस्ती "-
सोर भरी बस्ती में, जहाजों की हस्ति में,
मैंने एक छोटी सी कस्ती बनाई है।
इस सोर भरी बस्ती में ये किसने पुकार लगाई है,
माई मुझे भुक लगी है।
देखने में फकीर है, आंखों में उसके नीर है,
उसे कोई बड़ी पीर है, वक्त कि खाई तीर है।
पर दिल का वह अमीर है,
झोली में उसकी दुआएं हैं, ये दुआएं मेरे लिए आई है।
सोर भरी बस्ती में जहाजों की हस्ति में
"मैंने एक छोटी सी कस्ती बनाई है"।।