दिल - याद
गुम था कभी अपने में
कभी सपने में किसी अपने के
रोज़ आता हैं खयाल किसी अपने का
किसी रेहनुमा का किसी दिल गुज़र का
याद करता हूँ उनहे दिन रैन
कभी खवाबों कभी इरादों में
रेहता हैं साथ ऊनका मेरे पास
कभी वादों में कभी यादों में
साए में कटता है ये दिन
कभी छाँऔ में कभी राहों में
गुम था कभी अपने में
कभी सपने में किसी अपने के
- कुमार