मंजील कि बात किसे करनी है ऐ दोस्त.. ??
मज़ा तो रास्ते पर साथ चलने में है...फिर चाहें वह रास्ता कितना भी कठिन क्यों ना हो...!?
कांटे और अंगारे वांला रास्ता भी क्युं ना हो.. मगर तेरा साथ होगा तो हम उनपें भी मुस्कुराके चल देंंगे..
क्योंकी मुझे इतना यकीन तो है दोस्त तेरे साथ में...
कि तेरा साथ होगा तो सिर्फ और सिर्फ अच्छा ही महसुस होगा.. यह कांटे या यह अंगारे हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते.. ?