कोई स्त्री जब समाज के बंधनों से मुक्त हो के,
विचार और वर्तन से Bold हो जाती हे तो वो समाज के जूठे धिक्कारपात्र बन्ने का आसान सा लक्ष्य बन जाती हे,समाज उसपे अपना Socalled चरित्रहिन का lebel लगा देता हे.
असल में केवल स्त्री के २ इंच के शारीरिक अंग से उसके चरित्र को प्रमाणित करने वाला समाज उसी स्त्री की समाज हीत की प्रतिभा की अवहेलना कर के समाज ख़ुद अपने ही चरित्र पर प्रश्न चिन्ह लगा देता हे!