मोहब्बत की बात करते करते,
हम ऐसी जगह आ गए,
तुम्हारे जाने का सूनापन भी,
काटती नहीं अब,
सपने जो देखे थे साथ में,
नीव जिस घर का डाला था,
आज वो बनकर तैयार हो गया है,
जीवंत मेरे आंखो के सामने,
अब तो हर तरफ तुम्हारा ही बोलबाला है,
तुम्हारा ही चेहरा है तुम्हारा ही साया है,
अब वो मोहब्बत और गाढ़ा हो गया है,
जो मोहब्बत तुमने सिखाया था,
तुम नहीं हो,
फिर भी बड़ा हो गया है,
कौन कहता है तुम चली गई,
तुम्हारी दस्तक दिल पर और भी बड़ा हो गया है।
© Krishna Katyayan 2018