प्रिये मम्मी ,प्रणाम।
मम्मी कहना तो बहुत कुछ है जो कभी कह नहीं पायी आपसे। बहुत लड़ती थी न आपसे बहुत शिकायते करती थी बहुत याद आता है सब। सच में माँ जैसा प्यार कोई नहीं दे सकता। ससुराल में कहने को तो सब अपने है लेकिन अपना कोई नहीं है। हर रिश्ते में दिखावा ,छलावा लगता है। जब कपडे धोती हूँ आप बहुत याद आती हो ,मायके में कभी कपडे धोकर नहीं फैलाये और यहाँ सब के मुझे ही धोने पड़ते है। जब मुझे जुकाम होता था आप अजबाइन की चाय ,नमक के जावे ,कभी काढ़ा पिलाती थी यहाँ तो कोई पूछता ही नहीं हुआ क्या है ?जब सर्दी आती है आप बहुत याद आती हो। सर्दियों में आप मुझे ठण्ड से बचाने के लिए कभी जल्दी नहीं उठाती थी लिहाफ में बैठे हुए ही सब बिस्तर पर ही उपलब्ध हो जाता था। यहाँ ठण्ड ,में भी सूजी हुई उंगलियों से काम करना पड़ता है। मम्मी आपकी बहुत याद आती है जब मैं नहाकर आती हु ,आप मेरे बाथरूम से निकलने से पहले ही चाय अदरक वाली बनाकर तैयार रखती थी। और आपके हाथ की बानी चाय से ठण्ड कही दूर गायब हो जाती थी। आज कहती हूँ हाँ मैं आपसे बहुत बहुत प्यार करती हूँ। अब समझी हूँ आपके प्यार की कीमत। अब आपके दर्द और आपकी ख़ामोशी का एहस