सरजू रोज की तरह खाने का डिब्बा लिए कारखाने में दाखिल हुआ। उसे आज भी देर हो गई थी। कारखाने के मालिक का बुलावा आते ही उसका दिल तेजी से धड़कने लगा। आज भी मालिक उस पर बरस उठेगा।उसे लानत मलानत देगा।नौकरी से निकालने की धमकी तो वह हजारों बार सुन चुका है पर हर बार की तरह वह मालिक के क़दमों पर सिर रखकर रो लेगा। कहेगा-'मालिक, मेरा बेटा बीमार है। उसे अस्पताल लेकर गया था इसलिए देर हो गई ।' यह सब सोचते हुये वह मालिक के केबिन में डरते - डरते गया पर आश्चर्य आज मालिक ने उसे कुछ भी नहीं कहा, बल्कि उसके बीमार बेटे के बारे में पूछा।
वह मालिक का धन्यवाद कर केबिन से जाने लगा पर हर बार की तरह उसकी नजर टेबल पर रखे हुए मालिक के लंबे से टिफिन पर पड़ी। वह अपलक कुछ देर तक मालिक के टिफिन को देखता रहा फिर एक गहरी सांस लेकर चला गया।
वह अक्सर सोचता कि इतने बड़े कारखाने के मालिक के इतने लंबे टिफिन में क्या-क्या होता होगा? वह मन ही मन तमाम तरह की लजीज व्यंजनों की कल्पना करता। वह अपने टिफिन में देखता ।दो सूखी रोटी और सादी दाल। कभी - कभी कोई सूखी सब्जी मिल जाती तो कभी- कभी हालात इतने पस्त होते कि उसे केवल सूखी रोटी और प्याज मिर्च से काम चलाना पड़ता। ऐसे में मालिक के टिफिन की उसे याद आती।
आज अचानक लंच टाइम में मालिक ने उसे बुलाया। वह डरते झिझकते मलिक के केबिन में गया। उसे देखते ही मालिक ने कहा,' सरजू, आज मेरी तबियत थोड़ी ठीक नहीं है। आज चपरासी भी छुट्टी में है। ऐसा करो जरा मेडिकल से दवाई ले आओ और सुनो ये टिफिन भी ले जाओ ।आज खाने का बिल्कुल मन नही हो रहा है। उधर कहीं गाय या कुत्ते को खिला देना। क्या है भरा टिफिन देख कर तुम्हारी मालकिन बहुत नाराज होती है।'
सरजू टिफिन लेकर केबिन से निकला तो उसका दिल बल्लियों उछल रहा था।उसने सोचा गाय या कुत्ते को क्यों दूँ ।आज मालिक का टिफिन खा कर देखता हूँ । बड़ा मजा आएगा। यह सोचते हुए वह सबसे छुपाता हुआ सुनसान स्थान पर आ गया। वह एक साफ जगह पर बैठ कर इत्मीनान के साथ टिफिन खोलने लगा । जैसे ही उसने टिफिन खोला तो वह दंग रह गया। मालिक के उस बड़े से टिफिन में दो सूखी रोटी, सादी दाल, उबली हुईं सब्जियां और सलाद के कुछ टुकड़े थे।
बाद में उसे पता चला कि उसके मालिक को हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और कई तरह की बिमारियां हैं। जिसके चलते वे चाह कर भी अच्छा खाना नहीं खा सकते।
उसने ईश्वर का धन्यवाद किया कि उसे ऐसी कोई भी बीमारी नहीं है।
उसे अब अपना टिफिन ही सबसे अच्छा लगने लगा।
डॉ. शैल चन्द्रा
रावण भाठा, नगरी
जिला- धमतरी
छत्तीसगढ़
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