मोहब्बत की दरिया के,
उस पार वो थी,
इस पार मै,
उनने इशारा दिया,
मै कूद गया पार करने को,
तैरना नहीं आता था फिर भी,
डूबा नहीं दरिया की गहराई में,
थका नहीं पाने की चाह में,
हा,वक़्त लग गया पहुंचने में,
पर जब पहुंचा,
तब तक वो जा चुकी थी,
किसी और के नाव में,
या तो मै धीरे था,
या उनको जल्दी थी जाने की।
इंतज़ार वाला प्यार।
© Krishna Katyayan 2018