मैं गुजरा हुआ कल हूं
वक्त के साथ बीत गया
यादों का जख्म सीने में छुपा कर
तन्हाई का रोग लगा बैठा
आंसूूूओ का दरिया बनकर भी गुजरा हूं
सादगी के पल मुझे याद दिलाते हैं
यादों का बवंडर आंखों के सामने से गुजरे
आंखों में आंसू निकल आते हैं
मैं फिर भी सहन करता हूं
मुझ में बहुत से कल बीत गए
एक अनोखा लम्हा था जिसका
आज भी मुझे गम है ....