#MKGANDHI
गाँधी जी देश,व्यक्ति,और प्राणी मात्र से प्रेम रखने वाले सहृदय सन्त एवं प्रभाशाली व्यक्तित्व थे । इसके साथ ही उनमें एक दोष था कि वह मानवीय गुणों के प्रभाव से पूर्णरूपेण मुक्त नही थे । इसीलिए वह छुआछूत की भावना को चाहते हुए भी मिटा नही पाए । उन्होंने अछूतों को दया दृष्टि से हरिजन कहा । केवल अछूतों को हरिजन कहना समानता के अर्थ से दूर है इस तरह उन्होंने पुनः संकेत कर दिया कि आज का हरिजन ही कल का अछूत है ।
यदि हरि का अर्थ ईश्वर है तो सभी लोग हरिजन क्यों नही हैं ?