#kavyotsav
सारे रिश्तो को तो भगवान ने ही मेरे लिए था बुना,
पर ऐ! मेरे दोस्त, तुझे मैंने मेरे लिए चुना |
वह हमारा पगडंडियों पर दौड़कर स्कूल जाना,
वह तख्ती पर पहला अक्षर बनाना |,
सब याद है मुझे |
वह हर कक्षा में हमारी यादें, हमारी अटहेलिया, हमारी शरारतें
सब याद है मुझे |
फिर कुछ बनने की खातिर हमारा शहर आना
और वक्त के साथ
कुछ बनकर दिखाना |
लेकिन वक्त के सफर में,
हम जैसे खो गए |
हम तुम दूर क्या हुए,
कुछ गमजदा से हो गए|
चलो फिर से मिलकर,
वो,
पुराना वक्त दोहराते हैं
उस वक्त में वापस तो नहीं जा सकते,
लेकिन मेरे दोस्त,
हम तुम मिलकर फिर से वही वक्त वापस ले आते हैं |