#Kavyotsav
#ग़ज़ल (एक बार मिले जो हम)
एक बार मिले जो हम ,ऐहसास करा देंगे ।
कुछ तो तकलीफें थीं , मुँह मोड़ा नही हमनें ।।
हर रात मेरे ख़्वाबों में , तेरा ही तसब्बुर था ।
मेरी जान तेरे दिल में , दिल तोड़ा नही हमनें ।।
अपना तो ये वादा था , एक बार मिलेंगें हम ।
मौसम ने बहारों का , अंदाज बदल डाला ।।
रिश्तों के चमन में जो , पतझड़ का बसेरा है ।
तू भूल गई मुझको , तुझे छोड़ा नही हमने ।।
उल्फत के कबूतर की , खामोश गुटरगूँ है ।
आँधी के थपेड़ों से , झोंकें हैं हवाओं के ।।
आजाद परिंदे को , आकाश नही भाता ।
गुमशुम है अकेला है , उसे छेड़ा नही हमने ।।