#काव्योत्सव
चले जाना
एक के ऊपर एक तह कर के तुम्हारी यादों को दिल में सजा राखी है
एक बार इन यादों की अलमारी को खोल तो लो
फिर चले जाना
मुझे पता है हम नहीं रहे तुम्हारी नजरों में वो पहले जैसे
एक बार मेरी नजरों की सच्चाई पढ़ तो लो
फिर चले जाना
तुम भी कहा रहे वो पहले जैसे जिसे खुद से ज्यादा मुझ पे यकीन था
एक बार वो पहले सा यकीन कर तो लो
फिर चले जाना
तुम भी कहाँ आए थे मेरी जिंदगी में वापस जाने के लिए, मुझे पता है
एक बार मेरी ख़ताओं की सजा बता तो दो
फिर चले जाना
तुम्हारे पास कई वजहें हैं मुझे छोड़ जाने की, मुझे पता है
रोक लूँ तुमको ऐसी एक भी वजह हो वो बता दो
फिर.....