#Kavyotsav
#इश्क़ और इंतिज़ार....
अरसे बीत गये अब उनके इंतज़ार में,
फिर भी वो बोलते रहे इंतज़ार करो थोडा इकमिनान् से..
भला सब्र का बांध अब कितने दिन टिकेगा,
प्यार का ये सेलाब अब और कितने दिन रुकेगा..
सलाम करता हु ऐ खुदा तुजे....
दिलो को तोड़ने का ये हुनुर थोडा सा हमें भी सीखा दिया होता,
तो शायद आज हम उनकी जगह और वो हमारी जगह होता....
जीता था तब एक ही उम्मीद थी,
आएगी वो कभीना कभी हमारे मंजर पे....
फैलाएगी अपना दामन और सेहलायेगी हमें अपने सांये में,
आज सोने जा रहा हु तब भी एकहि ख्वाहिश हे..
की शायद कफ़न में ही सही मगर आएगी वो
हमें कब्र से उठाने के लिए....
काश हमने पेहलें से ही अपना दिल कुर्बान न किया होता,
तो शायद आज भी महफ़िल-ऐ-इश्क़ में नाम हमारा
बड़े रुदबे से लिया जा रहा होता..
पर क्या करे ये कमबख्त ये दिल भी बड़ी अजीब चीज़ हे,
हे हमारा पर नाम उसका ही लेता हे,
उसकी आनेकी चाह में हर पल तड़पता हे,
जिन्दा रहों तो उसकी याद में सुलगता हे,
और मरने जाओ तो उसकी फिक्र में खुद रोता हे..
अब तो सांसे भी जा रही हे,
आओगी तुम हमें मरते देखने की
अब भी ऐसा ही कहोगी .??की सांसे भी छोडो मगर धीरे से