( मर्म )
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।
जो भैंस देश में 80% दूध की आपूर्ति करती है।।
वही आज स्लॉटर हाउस में बिना किसी प्रतिबंध के कटती है।।
सब दूध पीते भैंस का रोटी गाय माता को खिलाया जाता है।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-2
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
दूध पिलाती सबको फिर भी माता न कहलाती है।
गोरी चमड़ी वाली गाय ही माता कहलाती है।।
इसी तरह काले गोरे का भ्रम फैलाया जाता है।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-2
ऊंच नीच का भेद अभी भी अंदर बिगुल बजाता है।
जहाँ बेटी लक्ष्मी कहलाती वहीं जिन्दा भी जलाया जाता है।
लोकतंत्र की बात न करना इससे दूर दूर का नाता है।।
अब भी देश में दलितों को मंदिर से भगाया जाता है।।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-2
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
बेटा पैदा होने पर खुशियों के दीप जलाते हैं।-3
बेटी पैदा होने पर कूड़े में बहाया जाता है।।
ऊंच नीच का भेद अभी भी अंदर बिगुल बजाता है।।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-३
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
जहाँ बरगद पीपल पूजे जाते नीम में देवी रहती हैं।
जहाँ हर आँगन में तुलसी पर जल बरसाया जाता है।।
उसी देश में निजी स्वार्थ से जंगल कटवाया जाता है।।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-३
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
गौ रक्षा का ढोंग रचाकर आपस में लड़ाया जाता है।
वाह रे देश कि ढोंगी जनता तुझसे बड़ा महान कहाँ।।
तक़लीफ़ से रोना कुत्ते का अप्सगुन बताया जाता है।।।
सुबह सुबह बासी रोटी से पुण्य कमाया जाता है।।-३
क्या कभी देश में किसी भैंस का मर्म सुनाया जाता है।
-लक्ष्मी नारायण 'पन्ना'