बचपन से था मैं , पढ़ाई में होशियार ,
मा - बाप का करना था ,सपना साकार ।
बनकर डॉक्टर मुजे ,लेनी थी कार,
चाहे जितना भी लेना पड़े ,दिमाग पे भार ।
फिर जमकर की मैने सारी पढ़ाई,
H.Sc में मेरी अच्छी नंबर आई ।
मम्मी-पापा ने भी सबको मिठाई खिलाई,
दोस्तों ने भी बोला, क्या बात हैं भाई ।
अगले दिन एडमिशन की लाइनमें खड़ा रह गया ,
एडमिशन मिलते हुए एक मार्कस से रहे गया।
देखा था जो , वो सपना टूट गया ,
मायूस होते हुए में घरपे लौट गया ।
रास्ते मे मुजे अपना दोस्त मिल गया,
आकर बोला उसे एडमिशन मिल गया ।
उसकी बाते सुनकर में पूरा हिल गया ,
कम मार्क्स में भी केसे एडमिशन मिल गया ।
था वो पूरा Reservation का खेल ,
जिंदगी से करता था वो लोगो को फैल ।
जल्दी से लेना होगा कोई Action ,
Please Say No to Reservation .