नमन नमन तुझको ऐ मेरे प्यारे शिक्षक।
हार को जीत में बदलना सिखाता है तू।
गम में भी हंसना सिखाता है तू।
चाहे सामने खड़ा हो मुसीबतों का पहाड़,
उससे भी लड़ना सिखाता है तू।
खुद कठिनाइयों भरा जीवन है जीता,
और हमें डॉक्टर इंजीनियर बनाता है तू।
पर गम मुझे तुझे हम याद करते सिर्फ 5 सितंबर को,
उससे पहले हर सांझ सवेरा,
उड़ाता तेरा उपहास सारा समाज।
पर तू लड़ा,तू ना डरा
तू अडिग रहा हम शागिर्दों को
खुद से ऊंचा बनाने को।
इसलिए नमन फिर से नमन
तुझे ऐ मेरे प्यारे शिक्षक।
लेखक-अरमान अजहर टेनावाला©