कृष्ण विभिन्न रूपों में मेरे जीवन में समाए हैं। नटखट माखनचोर मेरे ह्रदय को वात्सल्य से भर देता है।
मुरली की सुरीली तान से वह चितचोर मेरे दिल को चुरा लेता है।
कंस के अभियान को कुचलने वाला। अपनी उंगली पर गोवर्धन उठाने वाला मेरे मन में वीर रस का संचार करता है।
दीन हीन सुदामा को दौड़ कर गले लगाने वाला द्वारकाधीश मित्रता का सही अर्थ समझाता है।
जीवन समर में जब मैं पार्थ की भांति सही राह नहीं चुन पाता तो गीता की वाणी से सही राह दिखाता है।
मेरे मार्गदर्शक योगेश्वर कृष्ण मेरे आराध्य हैं।