कल हल्की-हल्की बारिश थी ,
कल सर्द हवा का रक़्स भी था ,
कल फूल भी निखरे-निखरे थे ,
कल उनमें आप का अक़्स भी था,
कल बादल गहरे काले थे ,
कल चांद पे लाखों पहरे थे ,
कल यादें उलझी-उलझी थी,
और कल तक यह न सुलझी थी ,
कल-याद-बहुत-तुम-आए-थे ,
कल-याद-बहुत-तुम-आए-थे !!