जब मेरा दिल दिमाग पे हावी हो जा हे
में लिखता हूं तब...
जब कोई खुशी या गम देता है...
में लिखता हूं तब...
जब होता है मेरा मन बेचैन...
में लिखता हूं तब...
जब कोई मेरे विश्र्वास को नकारता है...
में लिखता हूं तब...
जब कोई मेरे कोमल दिल को पथ्थर समझता है...
में लिखता हूं तब...
लिखना मेरा शोख नहीं है पर में लिखता हूं तब...
जब मेरा दिमाग नहीं दिल कहता है...