कोई होता है जो खुद को खुदसे वाकिफ कराता है
वो होता है आयने से भी साफ...
मेरी लाख गलतियों के बावजुद,
थोड़ा रूठने के बाद वो करते है मुजे माफ...
में तो अंजान इस दुनिया की फितरत से...
में सिर्फ वाकिफ हु तेरे वजूद से...
अब रूठेगी तू मुजसे...
तो कोन वाकिफ़ करायेगा मुजे खुदसे..