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Beyondwords

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@jatinlad746528


प्रेम
स्वभाव में होता है, शब्दों में नहीं... क्योंकि शब्द तो दिखावे भी हो सकते हैं, पर स्वभाव कभी झूठ नहीं बोलता।

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નદી, સરોવર કે દરિયો હોય તો પાર જઈએ,
પણ સૂકી આંખોના જળમાં અમે ડૂબી જઈએ…
આંસુઓ હોત તો કદાચ હળવાશ મળી જાત,
આ નિઃશબ્દ પીડાને અમે ક્યાં સુધી છુપાવી જઈએ…
હસતા ચહેરા પાછળ તૂટેલા સપના રાખ્યાં છે,
લોકો સામે આ સચ્ચાઈ અમે કઈ રીતે કહી જઈએ…
ખામોશી પણ હવે તો ચીસો પાડે છે અંદરથી,
એ અવાજોથી ભાગીએ તો ક્યાં સુધી ભાગી જઈએ…
કિનારો મળે બહારના દરિયામાં ક્યારેક,
પણ દિલના દરિયામાં તો અમે હર વાર ખોવાઈ જઈએ… 💔
- Beyondwords

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લોકો થોડા કડવા શબ્દોથી જ આપણો સ્વભાવ તોલી લે છે,
પણ અંદરના દુઃખને ક્યારેય સમજતા નથી।
દરેક સંબંધ આખી જિંદગી ચાલે એવો નથી,
ક્યારેક અલગ થવું પણ જરૂરી હોય છે।
એકતરફી સંબંધ ફક્ત દુઃખ આપે છે।
એટલે જે અંદરથી તોડી નાખે એ મોહને છોડવો સારું,
કારણ કે ચૂપચાપ સહેલું દુઃખ ક્યારેક મોતથી પણ ભારે લાગે છે।
- Beyondwords

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कभी-कभी ज़िंदगी में
कुछ रिश्ते नाम के मोहताज़ नहीं होते,
ना कोई वादा, ना कोई हक…
फिर भी दिल उन्हें अपना मान बैठता है।
बातें भले ही कम हों,
पर खामोशियों में उनका शोर बहुत होता है…
एक मैसेज, एक कॉल,
या बस उनका नाम स्क्रीन पर दिख जाए—
और दिल… जैसे थोड़ी देर के लिए जी उठता है।
अजीब है ना…
जिसे पा नहीं सकते,
उसी के लिए सबसे सच्ची दुआ निकलती है।
क्योंकि ये मोहब्बत पाने की नहीं होती…
ये तो बस चाहने की होती है—
बिना शर्त, बिना उम्मीद, बिना किसी मंज़िल के।
शायद इसी को कहते हैं…
"खुद से ज्यादा किसी और की खुशी में सुकून ढूंढ लेना।"
और सच कहूँ—
ऐसी मोहब्बत अधूरी जरूर होती है,
पर झूठी कभी नहीं होती… 💔✨
@beyond_word✍️

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समय से भी ज़्यादा कीमती होती हैं ये भावनाएँ,
पर हमने उन्हें ऐसे शख़्स पर लुटा दीं,
जिसे हमारी कद्र ही नहीं थी…
वो ख़ामोशी क्या समझती,
जो हमारे लफ़्ज़ों को भी न समझ सकी,
हम धड़कनें सुनाते रहे,
और वो हमें शोर समझते रहे…
- Beyondwords

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“મારું જીવન તો એક ખુલી ગયું પુસ્તક છે,
જે કોઈ પણ પાને પાને વાચી શકે—
એમાં સારા કર્મોની સુગંધ પણ છે,
અને જાણે-અજાણે થયેલા ખોટા પગલાંની રાખ પણ છે.
બધું જ છે આ ખુલ્લા પુસ્તકમાં… બસ ફરક એટલો કે,
જે સમજથી વાંચે, એને જ તેનો અર્થ સમજાય.”
- Beyondwords

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“कर्म एक ऐसी होटल है,
जहाँ ऑर्डर देने की ज़रूरत नहीं पड़ती;
वक़्त आने पर थाली में
वही सजकर आता है,
जो हम ख़ुद अपने हाथों से
पका कर रख चुके होते हैं।”
- Beyondwords

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राख ओढ़कर जो सच को जीता है,
वो हर झूठे रिश्ते से रीता है।
यहाँ ना सुंदर, ना कुरूप का भेद है,
हर चेहरा अंत में बस भस्म का खेद है।
जिसे दुनिया अपवित्र कहकर ठुकराती है,
अघोरी उसी में शिव को पाता है।
मांस, मरण, और मौन का संग है,
यहीं असली जीवन का प्रसंग है।
जहाँ डर खत्म, वहीं दरवाज़ा खुलता है,
जो भागे श्मशान से, वो जीवन भर जलता है।
अघोरी कहता—ना कुछ तेरा, ना मेरा अधिकार है,
जो है, बस इस क्षण का उधार है।
ना पाप यहाँ, ना पुण्य का हिसाब है,
हर कर्म बस एक अधूरा जवाब है।
जब टूटे हर धारणा, हर विचार है,
तभी दिखे—तू ही शिव, तू ही अंधकार है। 🔱

@beyond_word✍️

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કર્મનો સગાથી મારો કોઈ નથી,
બાકી બધા તો માર્ગના મુસાફર છે.
હિસાબ તો અંદરનો જ ચાલે છે,
બહારના સંબંધો બધાં અસ્થાયી છે.
- Beyondwords✍️

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किसी मुश्किल मोड़ पर
तुम मेरा हाथ छोड़कर चली गई…
मैं उस पल टूटा नहीं था,
बस खामोशी से अंदर ही अंदर बिखर गया था।
बहुत कुछ कहना था,
चीखना था, रोकना था तुम्हें…
पर अजीब है ना—
मेरी आवाज़ भी तुम्हारे साथ ही चली गई।
तब समझ आया—
मोहब्बत में दरवाज़े हम खोलते हैं,
मगर उन्हें बंद करने वाले
वही होते हैं… जिन पर हम सबसे ज़्यादा यकीन करते हैं।
जिसे मैंने अपना सुकून समझा,
वही मेरी बेचैनी बन गया…
जिसे अपना घर कहा,
वही मुझे बेघर कर गया।
और आज भी…
उस दरवाज़े के बंद होने की आवाज़
मेरे अंदर गूंजती रहती है—
हर बार मुझे थोड़ा और तोड़ जाती है।
हाँ, एक खिड़की खुली थी कहीं…
मगर वहाँ से कोई उजाला नहीं आया,
बस मेरा अपना अकेलापन
मुझे घूरता रहा।
सच तो ये है—
तुम्हारा ना मिलना इतना दर्द नहीं देता,
जितना ये एहसास देता है कि
मैंने तुम्हें सच में अपना मान लिया था…
और मेरी गलती बस इतनी थी—
कि मैंने तुम्हें चाहा…
सिर्फ चाहा नहीं,
पूरी तरह से तुम्हारा हो गया था…

- beyond_word l✍️

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