‎समर्पण से आंगे by vikram kori in Hindi Novels
‎part - 1‎‎सुबह के छह बज रहे थे।‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो...
‎समर्पण से आंगे by vikram kori in Hindi Novels
‎‎ भाग – 2‎‎उस रात अंकित देर तक सो नहीं पाया।‎‎कमरे की बत्ती बंद थी, लेकिन दिमाग़ में सवालों की रोशनी जलती रही।‎“कल मत आ...
‎समर्पण से आंगे by vikram kori in Hindi Novels
‎भाग -3‎बारिश के बाद की सुबह कुछ ज़्यादा ही खामोश थी।‎‎मंदिर के सामने वही जगह, वही फूलों की खुशबू—‎लेकिन आज हवा में कुछ...
‎समर्पण से आंगे by vikram kori in Hindi Novels
‎‎भाग – 4‎‎गाँव की बस सुबह-सुबह शहर पहुँची।‎‎अंकित प्लेटफॉर्म पर खड़ा था, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।‎उसे पता था—आज सि...
‎समर्पण से आंगे by vikram kori in Hindi Novels
‎भाग – 5‎‎‎माँ के फैसले के बाद सब कुछ बाहर से सामान्य दिख रहा था,‎लेकिन अंदर ही अंदर हर रिश्ता किसी कच्ची दीवार की तरह द...