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कहानी: कारखाना “आप अगर मेरा साथ दोगे तो मैं अपने कारखाने को मिला इतना बड़ा ऑर...
चलो दूर कहीं... 12पश्चिम क्षितिज पर सुरज, किसी नई नवेली दुल्हन के घूंघट की भांति...
मल्होत्रा कोई साधारण परिवार नहीं थे। वे तीन पीढ़ियों से चले आ रहे ,काले कामों के...
एपिसोड 8: शादी की तैयारियां और नए सफर की शुरूआत पटना की गलियों में अब एक नई चर्च...
" कोवा काटे " मंजिले कहानी सगरे की 4--भी कहानी --------- ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर...
मैं और अंकिता बाहर निकलकर देखने लगे।प्रियांशी भी बाहर आ गई और बोली,“अरे, क्या हो...
धीरे धीरे ऐसे ही चार साल बीत गए। इन चार सालों में राजन और त्रिशा के जीवन में बहु...
जिंदगी के दूसरे किनारा पार्ट 7 और वही मेघना सरकारी कर्मचारियों को यह करते देख और...
कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ाआवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
बहुत से स्टूडेंट्स एक बोर्ड के सामने खड़े अपना -अपना रिजल्ट देख रहे थे। स्टूडेंट का एक बड़ा ग्रुप धक्का -मुक्की करते हुए अपने रिजल्ट पहले देखने ही होड़ में लगा हुआ था। वहीं कुछ दू...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
आयशा की शादी को पाँच साल हो चुके थे। उसका पति, करण, एक अच्छा आदमी था — मगर उसके लिए आयशा एक 'पत्नी' से ज़्यादा एक 'ज़िम्मेदारी' थी। उसके शरीर को छूना भूल चुका था। उ...
मुख्य किरदार: आरव सिंह मेवाड़ – एक अमीर, घमंडी और सख्तदिल बिज़नेसमैन। रागिनी शर्मा – एक साधारण लेकिन आत्मसम्मानी लड़की, जो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। --- ? क...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
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