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हम फिर से मिले मगर इस तरह{ ऐपीसोड़ -15}जैसे जैसे वह उस जंगल के रास्ते से बाहर नि...
यह “अधूरी मोहब्बत” का चौथा अध्याय है। पिछले अध्याय में आपने देखा कि राधा और अर्ज...
मैं आपको दोनों फॉर्मेट दे रहा हूँ ताकि आप इसे1️⃣ Business Magazine Style Article...
अयान को लगा जैसे आसमान उसके सिर पर गिर पड़ा हो। "रॉय खानदान? वारिस? पागल हो गई हो...
: : प्रकरण 59 : : सपनो के अभाव से गली, मोहल्लेकी क...
लेखक - एसटीडी मौर्य ️कटनी मध्य प्रदेश ट्रेन से उतरने के बाद हम लोग स्टेशन के बाह...
भाग 3: बादलों की लुका-छिपी और खुलते राज़रविवार की सुबह कबीर की आँखें उम्मीद से प...
सुमित घर पहुंचा तो बेला ने सामने आते हुए बोला क्या हुआ सुमित आप इतने गुस्से में...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 11 " दादू! एक बार कोले...
Part 5द ग्रैंड ग्रिमोइरे – वह खतरनाक किताब जिसमें शैतान को बुलाने की विधियाँ लिख...
यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है। एक दिन मैं अपनी डायरी में कहानी लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी। मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बु...
मुंबई की बारिश का कोई भरोसा नहीं होता। कभी यह सुकून देती है, तो कभी ज़िंदगी की रफ्तार थाम देती है। उस रात भी कुछ ऐसा ही था। आसमान से पानी की चादर गिर रही थी और शहर की चकाचौंध लाइटे...
खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
कभी-कभी ज़िंदगी वो सवाल पूछ लेती है... जिनका जवाब सिर्फ ख़ामोशी के पास होता है। और मोहब्बत... वो अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहाँ लोग टूट कर बिखर जाते हैं। सहर की हल्की सी रौ...
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