एकांश की बात का सत्यजीत जवाब देकर कहता है। अरे बैटा छोड़ो ना क्या तुम भी उसी बात पर अड़े हो।
एपिसोड 58. रोने की आवाज किसकी है ।
सत्यजीत की बात सुनकर एकांश कहता है।
अरे बोलिए ना क्या बात है । प्लिज !
एकांश के ज्यादा दबाव देने पर मिरा सब कुछ बोलकर सुनाती है। मिरा के सब सुनाने के बाद सत्यजीत कहता है।
वो सब तो ठीक है पर मुझे ! मुझे इसने भूत समझा और वहां से भूत भूत चिल्ला कर भाग गई। एकांश दोनो की बात को सुनकर हल्की मुस्कान देता है। जिसे दैखकर सत्यजीत कहता है।
अच्छा तो अब तुम्हे हंसी आ रही है। वाह क्या बात है । मैं ही पागल हूँ मुझे लगा एकांश तुम कमसे कम मेरी बात को समझोगे पर तुम भी अपनी छोटी मां के साईड ही हो। ।
एकांश कहता है ।
अरे नही चाचा ऐसी बात नही है। मैं कुछ और लौट रहा था। पर वो क्या है ना के छोटी माँ मुझसे इतना प्यार जो करती है। इसीलिए तो उन्हे पहले ही ुता चल गया के मैं यहां पर वर्शाली के साथ आने वाला हूँ ।
एकांश बड़ी चालाकी के साथ बात को घुमाते हूए कहता है। जिससे मिरा एकांश के बातों मे फंस जाती है । और हल्की मुस्कान देकर कहती है।
वो तो मैं ही हूँ जो एकांश को सबसे ज्यादा प्यार करती हूँ । वरना उस आईने मे मुझे ये कैसे पता चलता के एकांश और वर्शाली यहा पर आने वाली है। वो तुम दौनो मुझे इसी कपड़े मे दिखे थे।
मिरा की बात सुनकर सत्यजीत कहता है।
शायद तुम वर्शाली को भी उतना ही प्यार और पंसद करती हो। इसिलिए तो वो भी तुम्हे दिखी।
मिरा खुश होकर कहती है।
हां । ये बात तो है। तभी सत्यजीत फटाक से कहता है। हां और मैं भूत नजर आया । वाह क्या प्यार करने का तरीका है तुम्हारा । कोई उसी कपड़े मे दिखती है तो कोई भूत ।
सत्यजीत की बात सुनकर एकांश हल्की मुस्कान देता है । ताकी सत्यजीत उसे हंसते हूए ना दैख ले। और मिरा चुप होकर खड़ी रहती है। सत्यजीत की बात को सुनकर मिरा बात को बदलते हूए एकांश से पूछती है।
अच्छा बैटा ये बताओ के वर्शाली तुम्हे कैसी लगती है ?
मिरा की बात सुनकर एकांश सरमाने लगता है क्योकी वहां पर सत्यजीत खड़ा था इसिलिए एकांश कहता है।
क्या छौटी माँ आप भी ना क्या बोल रही हो।
इतना बोलकर एकांश वहां से चला जाता है। एकांश के ऐसे चले से मिरा कहती है।
अरे इसमे सरमाने वाली क्या बात है। मैने ऐसा क्या पूछ लिया के वो सरमाने चला गया।
मिरा बात पर सत्यजीत कहता है। तुमने सब ठिक कहा पर तुम्हारी टाईमिगं गलत थी।
मिरा हैरानी से कहती है।
टाईमिगं गलत था का क्या मतलब ?
सत्यजीत कहता है।
क्यो की मैं यहां पर था पगली । मैं उसका चाचा हूँ । उसके पिता समान और कौन ऐसा बैटा है। जो अपने ही बाप के सामने लड़की पंसद आयी के नही इन सब के बारे मे वो बेचारा क्या बात करेगा।
इतना बोलकर सत्यजीत वहां से चला जाता है। जैसे ही सत्यजीत वहां से जाता है। के तभी वहा पर दौडकर एकांश आ जाता है। और मिरा से कहता है।
छोटी माँ वर्शाली मुझे बहोत अच्छी लगती है।
जैसे ही एकांश ये बात कहता है। के तभी वहां पर सत्यजीत वापस आ जाता है। और एकांश की बात तो सुन लेता है। एकांश सत्यजीत को दैखकर सरमाने कर इधर उधर दैखते हूए वहां से चला जाता है। एकांश के जाने के बाद मिरा कहती है।
अब आपका टाईमिगं सही नही है। बेचारी कितना खुश होकर आया था । और आप उसी टाईम पर टपक पड़े।
मिरा के इतना बोलने के बाद सत्यजीत और मिरा कुछ दैर तक एक दुसरे का मुह ताकते रहता है फिर एक दुसरे को दैखकर हंसने लगता है। उधर दक्षरात निलु और दयाल के साथ हवेली पर बैठा हुआ था। क्योकी निलु हॉस्पिटल से डिसचार्ज होकर आया था। निलु बहोत डरा हुआ था जो उसके चेहरे से साफ झलक रहा था । निलु को दैखकर दक्षरात कहता है।
निलु अब तुम्हे यहां डरने की कोई जरुरत नही है। तुम यहां पर बिल्कुल सुरक्षित हो।
दक्षराज की बात का निलु जवाब देकर कहता है।
मालिक मैं क्या करुं ! उस दिन मैने जो दैखा मैं उसे भूला ही नही पा रहा हू।
दक्षराज निलु के पिठ पर अपना हाथ रखते हूए कहता है।
यही तो मुझे जानना है के तुमने ऐसी क्या दैख लिया जो तुम इतना घबराए हूए हो। और फिर तुम्हारी ये हालत कैसे हूई ? बताओ निलु घबराओ मत।
निलु उस पल को याद करके और भी ज्यादा डर जाता है । और डर से उसकी आखे लाल और बड़ी बड़ी हो जाती है। निलु डर से अपनी कंपकपाती हूई आवाज से कहता है।
मालिक ! मैने उस दिन अपनी और सबकी मौत को दैखा । मौत ....!
निलु की बात को सुनकर दयाल और दक्षराज भी घबरा जाता है।
निलु फिर दक्षराज से कहता है।
हां मालिक । मैने उस दिन मौत को दैखा जो बहोत ही जल्द सबको आने वाली है।
निलु अपनी जख्म दक्षराज को दिखते हूए कहता है।
ये दैखिए मालिक उस राक्षस ने मोका हाल कर दिया है। मै .... मैं मौत के मुह से उस दिन बचकर आया हूँ।
दक्षराज निलु से पूछता है। निलु उस रात ऐसा क्या हुआ था तुम्हारे साथ जो तुम इस तरह की बातो कर रहै हो किसे दैख लिया था तुमने वहां पर जो तुम इतना घबराए और डरे हूए हो ?
निलु दक्षराज को अपनी डरी हूई आवाज मे बताते हूए उस पल मे चला जाता है। जहां पर निलु उस रात गाड़ी मे बैठकर बिड़ी पी रहा था। रात होने के वजह से चारों और काली अधेरा था । जहां पर मुश्किल से अपनी शक्ल भी ना दिखाई दे। रात को ठंड बहोत थी । निलु अपने दौनो को हाथो को आपस मे रगड़ते हूए कहता है। ये दयाल और मालिक ने आज आने मे इतनी दैर क्यो लगा दी। और ये ठंड । आत पता नही मौसम को क्या हो गया है।
पता नही अचानक से इतनी ठंड कहा से बढ़ गई। जब तक मालिक और दयाल आता है।
मैं गाड़ी के अंदर बैठकर ही इमका इतंजार करुगां वहां अंदर मे ठंड भी थेड़ी कम लगेगी।
इतना बोलकर निलु गाड़ी के अंदर बैठ जाता है और अपने पॉकेट से बिज़ी और माचिस को निकालकर बिड़ी को जला लेता है और बिड़ी का कस्त मारकर बिज़ी को दैखकर कहता है।
आज अगर तेरा साथ ना होता तो मैं यहां अकेले ठंज से सिकुड़ जाता।
इतना बोलकर निलु बिड़ी का कस्त बड़े मजे से लगाए जा रहा था। निलु बिड़ी का कस्त लगाए जा रहा था के तभी निलु को गाड़ी से कुछ दुरी पर किसी कि होने का आभास होता है। निलु को लगता है के शायद मालिक और दयाल आ गए। पर वहां पर ऐसी कोई बात नही थी।
निलु अपनी गाड़ी का शिशा थोड़ा सा डाउन करता है। तो उसे किसी की रोने की आवाज सुनाई दैता है। जिसे सुनकर निलु चौंक जाता है। और मन ही मन सोचती है।
ये अचानक इस अंधेरी रात मे कौन रोने लग गया। निचे उतर कर दैखता हूँ।
इतना बोलकर निलु गाड़ी से निचे उतर जाता है। अंधेरी बहोत ही ज्यादा होने को कारण निलु को ज्यादा साफ नही दिखाई दे रहा था।
उफ ! इस अंधेरे मे तो अपनी मुह तक ना दिखे तो इसे कहां ढुंडु ।
निलु गाडी से उतर कर इधर उधर दैखने लगता है पर उसे वहां पर कोई नही दिखाई देता। निलु कहता है।
अरे वो रोने की आवाज तो इधर से ही आ रही थी पर अब अचानक ये रोने की आवाज आना बंद क्यो हो गई। निलु एक गहरी सांस लेता है और कहता है।
हाह । लगता है ये मेरा वहम था।
इतना बोलकर निलु दोबारा से गाड़ी मे आकर बैठ जाता है और बिड़ी का कस्त लगाता है। निलु को फिर से उसी आदमी के रोने की आवाज सुनाई देता है। निलु कहता है ।
ये कौन ऐसे रो रहा है। अभी मैने दैखा तो वहां पर कोई नही था तो फिर ये अचानक से रोने की आवाज कैसे आने लगी। आवाज लगाकर दैखता हूँ के कौन है ।
इतना बोलकर निलु आवाज लगाकप कहता है । अरे भाई कौन है और इतनी रात को यहां पर क्यों रे रहे हो ?
निलु के आवाज लगाने से रोने की आवाज बंद हो जाती है। निलु कहता है । हुह । पता नही कौन था पागल । चला गया शायद।
इतना बोलकर निलु फिर बिड़ी पिने लग जाता है के तभी निलु को ये ऐहसास होता है के पिछे से कोई उसकी गाड़ी को धकेल रहा है । निलु के जब ये एहसास होता है को निलु झट से गाड़ी का ब्रेक लगाता है पर ये क्या निलु दैखता है के गाड़ी मे पहले से ही हेंड ब्रेक लगा था और निलु दोबारा से पैर वाला ब्रेक दबाता है पर गाड़ी मे फिर भी ब्रेक नही लगता है।
निलु ये सब देखकर हैरान हो जाता है। के ये अचानक ये गाड़ी के ब्रेक को क्या हो गया । निलु अपने गुस्से भरे आवाज से कहता है।
अरे ओ पागल कौन है तु । और ये गाड़ी को धक्का क्यों दे रहा है। भाग यहां से वरना मेरे से बुरा कोई नही होगा।
निलु के इतना कहने पर गाड़ी अपने आप रुक जाती है। गाड़ी रुकने के बाद निलु गुस्से से कहता है।
रुक तुझे अभी बताता हूँ।
To be continue.....1218