Shrapit ek Prem Kahaani - 76 in Hindi Spiritual Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | श्रापित एक प्रेम कहानी - 76

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। 

> गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम वहां से भूत भूत चिल्ला कर क्यों भागी थी ?

 तभी वहां पर संपूर्णा और मिना भी आ जाती है। मिरा सत्यजीत से कहती है।

> मैं वहां से इसिलिए भागी क्योकी क्योकी उस कमरे 
के आईने मे मुझे अजीब अजीब से चीजें दिखाई देती है। और फिर एक दम से गायब हो जाती है। मुझे लगता है के हमारे घर मे किसी चुड़ेल का साया है। 

मिरा की बात पर मिना कहती है। 

> कहां क्या दैख लिया तुमने मिरा और घर मे किसकी साया है। 

तब मिरा मिना को कमरे के आईने मे घटित घटना को बोलकर सुनाता है। जिसे सुनकर संपूर्णा चिड़ कर कहती है। 

पहली बात तो ये के एकांश भाई तो यहां कभी आया ही नही और रही बात मेरी तो। आज मैं वही उसी कमरे मे गया था। पर वहा पर जाकर देखा के आप आईने के सामने खड़ी होकर पता नही क्या क्या बड़बड़ा रही थी इसिलिए मैं वहां से निकल गयी। 

संपूर्णा की बात को सुनकर सत्यजीत कहता है।

 मैं भी तो गया था उस कमरे मे पर तुमने मुझे दैखकर जौर जौर से भूत भूत बोलकर चिल्ला रही थी। पहले तो मैं भी घबरा गया के तुम अचानक मेरे चेहरे को दैखकर डर से क्यों भागी। तब मैने अपना चेहरा आईने मे जाकर दैखा तब जाकर मेरे को शांती मिली । 


मिरा कहती है ।

 पर मेरी बात का विश्वास किजिए मैं सच बोल रही हूँ मैने उस आईने मे आप को और संपूर्णा को दैखी थी और फिर सब गायब भी हो गए। 

सत्यजीत कहता है ।

 हाँ तो मैं कब बोल रहा हूँ के तुम झुट बोल रही हो। मैं और संपूर्णा गया तो था । ये तो हम भी बता रहे हैं। 

तभी मिरा झट से कहती है। 

और ...! और एकांश और वो वर्शाली वो दौनो फिर कैसे दिखाई दिए । 

मिना सोफे से उठकर मिरा के पास जाकर बैठ जाती है और कहती है। 

वो सब तुम्हारी वहम होगी मिरा क्योकी वो दौनो यहाँ पर है ही नही ।

 मिना के इतना कहते ही घर की डोर बेल बजती है। डोर बेल बजते ही संपूर्णा उठक कहती है । 

मैं जाकर दैखती हूँ के कौन है।

 इतना बोलकर संपूर्णा वहां से दरवाजा खोलने के लिए चली जाती है। और जैसे ही वो दरवाजा खोलती है वो दैखती है के बाहर वर्शाली और एकांश खड़ा था। दौनो को अचानक से एक साथ दैखकर संपूर्णा हैरान रह जाती है और दौनो वही खड़ी होकर एक टक दैखती रहती है। तभी एकांश संपूर्णा से कहता है। 

ये टुकुर टुकुर क्या दैख रही हो कोई भुत दैख लिया क्या ? हमे अंदर जाने दो ! 

तभी अंदर से आवाज आती है।

 कौन है बैटा वहां पर ! 

मिरा के इतना कहता ही वहां पर एकांश और वर्शाली भी आ जाती है। जिसे दैखकर सभी हैरान हो जाता है। सभी मिरा की बात को सच मानने लगता है के मिरा मे तो आईने मे दैखा वह सच था। सत्यजीत मिरा के कान मे धिरे से कहता है। 

तुम्हारी बात तो सच निकली यहां तो सही मे एकांश और वर्शाली आयी है। इसका मतलब वो आईना 100% सही दिखा रही थी। उस आईऩे तुम्हे तो फ्यूचर दिखा दिया। के आज एकांश और वर्शाली घर आने वाली है। 


मिरा चुपचाप एक जगह पर खड़ी थी। वह बस उन दौनो को हैरानी के साथ दैख रही थी। मिरा वर्शाली को निचे से उपर की और गौर से दैखती है और आईने मे दिख रही दृश्य को याद करती है और मन ही मन सोचती है। 

इन दौनो मे तो वही कपड़े पहने है जो मैने इन्हे आईने मे दैखी थी। हे भगवान ये सब क्या है । क्या मैने सच मुच का भविष्य दैखा । या कुछ और । 

मिरा को परेशान दैखकर एकांश समझ जाता है के छोटी माँ उसी आईने के बारे मे सौच रही है। जब उन्होने हमे कमरे के अदर दैख लिया था। सभी को चुपचाप खड़ी दैखकर मिना कहती है।

 अरे तुम सब ऐसे चुप क्यो खड़े हो । दैखो तो कोन आयी है। 

सभी मिना की बात को सुनकर वर्शाली की और दैखती है। वर्शाली को दैखकर सभी दैखते ही रह जाता है क्योकी वर्शाली बहोत ही ज्यादा खुबसुरत थी । उसके जैसा खुबसुरत आजतक सभी ने कभी नही दैखा था। सभी बस वर्शाली की खुबसुरती को दैखता रह गया था। 

एकाश संपूर्णा को कोनी मारकर इशारा करके पूछता है के वर्शाली कैसी लग रही है। 

संपूर्णा एकांश के कान मे धिरे से कहती है। 

भाई लगता है तुम परी लोक गए थे है ना। 

परी लोक का नाम सुनकर वर्शाली और एकांश दौनो ही घबरा जाता है।

 एकांश संपूर्णा से पुछता है। 

क्या परी लौक ! तुम पागल हो क्या।

 एकांश की बात सुनकर संपूर्णा कहती है। 

और नही तो क्या इतनी सुंदर लड़की मैने आजतक नही दैखी थी। कहां से लेकर आए इतनी सुंदर भाभी को ? 

संपूर्णा की बात को सुनकर सभी हंसने लगता है। और वर्शाली भाभी शब्द सुनकर सरमाने लगती है। पहले तो एकांश परी शब्द सुनकर घबरा जाता है के इसे कैसे पता चला के वर्शाली एक परी है। फिर सौच कर मन ही मन कहता है । 

अच्छा तो संपूर्णा वर्शाली की खुबसुरती को दैखकर ऐसी बात कही।

 संपूर्णा कहती है।

 वर्शाली तुम्हारे कपड़े कितने अच्छे है। ऐसे कपड़े तो बाजार मे भी नही मिलते है। कहां से लाई हो वर्शाली ? सचमुच का परी लग रही हो। 

वर्शाली हल्की मुस्कान के साथ कहती है। 

तुम्हे ये अच्छी लगी ?


संपूर्णा झट से कहती है।

 बहोत । 

वर्शाली कहती है। 

ठिक है मैं जब घर जाऊगी तब तुम्हारे लिए बिल्कुल ऐसे ही कपड़े ला दुगी। पर मुझे भी तुम्हारे जैसी कपड़े चाहिए ये कहां मिलेगा। 

संपूर्णा हल्की मुस्कान के साथ कहती है।

 वो तो मैं तुम्हे आज ही दिलवा दुगीं । भाई तुम्हें मार्केट ले जाएगा और तुम्हे जो पंसद ले लेना। 

संपूर्णा की बात सुनकर वर्शाली खुश होकर एकांश की और दैखती है। एकांश हाँ मे अपना सर हिलाते हुए कहता है। 

हाँ शाम को लेकर जाउगां। 

तभी मिना वर्शाली के पास आकर उसके गाल पर प्यार से हाथ फेरते हूए कहती है।

 कितनी प्यारी लग रही है मेरी बच्ची एक दम परी जैसी । 

वर्शाली बार बार परी शब्द को सुनकर घबराती है। और एकांश की और दैखने लगती है। एकांश वर्शाली को आख मारकर इशारा करते हूए कहता है --

के कुछ नही बस ये सब माँ का आदत है। वो तुम्हारी खुबसुरती को दैखकर ऐसा कह रही है। 

मिना अपनी बात को जारी रखते हूए कहती है।  

आओ बैटा तुम खड़ी क्यो हो ! तुम तो इस घर मे पहली बार आयी हो ना आओ मैं तुम्हारी मुह मिठा करवाती हूँ। 

मिना के इतना कहने पर संपूर्णा कहती है । 

आप रुकिए बड़ी मां मैं इनके लिए मिठाई लेकर आती हूँ ।

 इतना बोलकर संपूर्णा मिठाई लाने के लिए अंदर चली जाती है। वर्शाली घर को चारो और से गौर से दैखती है। मिना वर्शाली से कहती है। 

आओ बैटा मैं तुम्हे पूरा घर दिखती हूँ । 

इतना बोलकर वर्शाली मिना के साथ चली जाती है। मिना के जाने के बाद मिरा एकांश के पास आकर धिरे से कहती है़ । 

एकांश बैटा एक पूछु ?

 एकाश कहता है ।

 हाँ छोटी माँ पूछीये ना क्या बात है।  

एकांश मिरा को दैखकर समझ जाता है के मिरा उससे वही आईने वाली बात पूछेगीं। मिरा एकांश के पास जाकर धिरे से कहती है। 

बैटा एक सच सच बोलना । 

हाँ छोटी माँ कहिए ना । मैं आपको भला झुट क्यों कहूंगा ।

 एकांश कहता है। 

मिरा एकांश से झिझकते हूए कहती है। 

अच्छा बैटा ये बताओ के क्या तुम सच मे अभी आए या पहले भी आए थे । 

एकांश मिरा से कहता है। 

अभी आया मतलब क्या छोटी माँ । आपने तो दैखा ना के मैं कहां से आया। क्या बात है छोटी माँ क्या कोई परेसानी है ? 

मिरा कुछ कहती इससे पहले सत्यजीत कहता है। 

कुछ परेसानी नही है बैटा । बता नही मिरा को आज क्या हो गया । सुबह से अजीब - अजीब बाते कर रही है।

 सत्यजीत मिरा से कहता है। 

ये कैसा सवाल था मिरा । तुमने तो खुद अपनी आखो से दैखा ना के एकांश आगे दरवाजा से आया। 

मिरा कुृछ और कहती के तभी सत्यजीत मिरा को चुप रहने का इशारा करता है।

 एकांश तो सब जानता था के मिरा किस बारे मे बात कर रही है। फिर भी एकांश चालाकी से बनते हूए पूछता है।

 छोटी माँ कुछ बात है तो बताईऐ ना। 

एकांश की बात का सत्यजीत जवाब देकर कहता है। अरे बैटा छोड़ो ना क्या तुम भी उसी बात पर अड़े हो।

To be continue....1205