hindi Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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सिंघनी माता का रहस्य - अध्याय 3 By Abhijeet Nayan

सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 7 By Shivraj Bhokare

दोहा:१३अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥कथा: "संतुलन की डोर"एक वीणा वादक था जो अपनी वीणा के तारों को कस रहा था। उसने सोचा कि तार जितने ज़्या...

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महाभारत की कहानी - भाग 230 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३४ युधिष्ठिर की उदारता और धृतराष्ट्र के प्रति भीम का दुर्व्यवहार   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने क...

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स्वर्ग का दरवाजा - 3 By Author Pawan Singh

इस एपिसोड को हम एक सवाल से शुरू करते हैं। चलिए बताइए क्या आपको आपका गोत्र याद हैं? अगर आप भारतवर्ष में रहते हैं तो आप किसी न किसी ऋषि परंपरा का हिस्सा ज़रूर होंगे। ये ऐसा समझिए किस...

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भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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‌परम शक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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अप्प दीपो भवः...- बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में था।किताबें...जो सिर्फ पन्ने नहीं होतीं...कई बार वे मनुष्य को नया मनुष्य बना...

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वेदान्त 2.0 - भाग 39 By Vedanta Life Agyat Agyani

 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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फल्गु को माता सीता का श्राप By Abhijeet Nayan

फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दिनों में पृथ्वी पर भटकते हुए गया नगरी पहुँचे थे। गया उस समय भी पवित्र स्थान माना जाता था, जहाँ पित...

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सिंघनी माता का रहस्य - अध्याय 3 By Abhijeet Nayan

सिंघनी माता का रहस्य — अध्याय 3राजेश की बात सुनते ही चारों ओर सन्नाटा छा गया। कुछ क्षण तक कोई कुछ नहीं बोला। तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक भारी आवाज गूँजी—“राजेश… क्या तुमने सच मे...

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दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

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अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 7 By Shivraj Bhokare

दोहा:१३अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥कथा: "संतुलन की डोर"एक वीणा वादक था जो अपनी वीणा के तारों को कस रहा था। उसने सोचा कि तार जितने ज़्या...

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महाभारत की कहानी - भाग 230 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२३४ युधिष्ठिर की उदारता और धृतराष्ट्र के प्रति भीम का दुर्व्यवहार   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने क...

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स्वर्ग का दरवाजा - 3 By Author Pawan Singh

इस एपिसोड को हम एक सवाल से शुरू करते हैं। चलिए बताइए क्या आपको आपका गोत्र याद हैं? अगर आप भारतवर्ष में रहते हैं तो आप किसी न किसी ऋषि परंपरा का हिस्सा ज़रूर होंगे। ये ऐसा समझिए किस...

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भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

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शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

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स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

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आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

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‌परम शक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (32) की व्याख्या "स्तोतुर्मघवन काममा पृण"। ऋगुवेद ---१/५७/५भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र :“स्तोतुर्मघवन् काममापृण।”— ऋगुवेद --1.57.5पदच्छेद...

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अप्प दीपो भवः...- बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

रांची की वह सुबह आज भी याद है...ठंडी हवा थी...सड़कें धीरे-धीरे जाग रही थीं...और मैं किताबों की तलाश में था।किताबें...जो सिर्फ पन्ने नहीं होतीं...कई बार वे मनुष्य को नया मनुष्य बना...

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वेदान्त 2.0 - भाग 39 By Vedanta Life Agyat Agyani

 ,  वेदांत 2.0: 'अज्ञात अज्ञानी' के अस्तित्व-दर्शन और वैज्ञानिक अद्वैत का गहन विश्लेषणआधुनिक दार्शनिक चिंतन के धरातल पर 'वेदांत 2.0' का उद्भव एक ऐसी क्रांतिकारी घटन...

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चेतना का स्रोत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"भावार्थ --हे प्रभु ! सारी विद्याओं का आदि‌ मूल‌ तू ही‌‌ है।मंत्र —विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2पदच्छेद-विश्वेष...

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वह देवों का देव By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(34) की व्याख्या-- "देवो देवनामसि"ऋग्वेद- 1-94-13अर्थ--हे प्रभु ! तू देवों का देव है।विस्तृत भावार्थ :इस मन्त्र में परमात्मा की सर्वोच्चता बताई गई है। संसार में जो भी...

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Hero - 4 By Ram Make

लेकिन जतिन जैसे ही कमरे से बाहर निकलता है । अरुण जतिन से पूछता है। "जतिन महागुरु तुमसे क्या कह रहे थे। " फिर जतिन कहता है महागुरु ने कहा है। जो उन्होंने कहा है वह किसी को भी मत बता...

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मुक्ति की कामना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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सर्वभूतहितेरत By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्रभु ! तू हमारी सन्तानों को नष्ट न कर।शब्दार्थ--मा = मत / नहींनः = हमारीप्रजा = सन्तान, ल...

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सत्य की खोज By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३७) की व्याख्या "सत्या मनसो मे अस्तु"ऋगुवेद--१०/१२८/४भाव--मेरे‌‌ मन के भाव सच्चे हों।"सत्या मनसो मे अस्ति"पदच्छेद--सत्या । मनसः । मे । अस्ति ।शब्दार्थ--सत्या — सत्य...

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व्रत और उपवास By Kapil Tiwari

“व्रत” और “उपवास” ये शब्द आपने कई बार सुने होगे क्या आप इनका वास्तविक अर्थ जानते है? व्रत का अर्थ है “संकल्प ” जो हमेशा मन से निकलता है। और मन क्या है ?अभी अहम का घर है आज कल के लो...

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शत्रु हृदय में भय By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (३८) की व्याख्या --"भियं दधाना हृदयेषु शत्रुव:"ऋगुवेद--१०/८४/७भाव--शत्रु के हृदय में भय उत्पन्न कर दो।भियं दधाना हृदयेषु शत्रूणाम्।शाब्दिक अर्थ--भियम् — भयदधाना — ध...

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साहस मत छोड़ो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (39) की न धृष्णुं त्यजेत--९/९७/७ऋगुवेदभावार्थ --साहस मत छोड़ो।पूरा मूल मंत्र --यहाँ दिया गया संदर्भ ऋग्वेद 9.97.7 से जुड़ा है, जो ऋगुवेद के सोम मण्डल (नवम मण्डल) का...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 76 By CHIRANJIT TEWARY

सत्यजीत अपनी एक भोंहे उपर करते कहता है। > गए थे ..! गए थे का क्या मतलब मिरा। मैं तो वही था। और तुम मुझे दैखकर ऐसी भागी जैसे मैं तुम्हारा पति नही बल्की मैं कोई भूत हूँ। और फिर तुम व...

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उसके समान कोई नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४०) की व्याख्यान त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता --ऋगुवेद--१/८४/१९भावार्थ --हे मघवन(ईश्वर) ! आपके सिवा  दूसरा सुख देने वाला कोई नहीं है।“न त्वदन्यो मघवन्नस्य मर्दिता”पद...

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परम ज्योति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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