hindi Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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देवी उपपनिद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

देवी उपनिषद --देवी उपनिषद् (देव्युपनिषत् / देवी अथर्वशीर्ष) अथर्ववेदीय शाक्त उपनिषदों में प्रसिद्ध है। इसमें देवी को केवल किसी एक रूप की देवता न मानकर ब्रह्मस्वरूपिणी, प्रकृति, पुर...

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श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा - भाग 17 By Banwari Lal

श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा भाग 17 — अर्जुन का मोह और भगवद्गीताजय श्रीकृष्ण पिछले भाग में आपने जाना कि पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध रोकने के लिए श्रीकृष्ण ने अंतिम समय तक शांति का...

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कठरुद्रोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

कठरुद्रोपनिषद कठरुद्रोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध संन्यास-उपनिषद् है। उपलब्ध पाठ में आरम्भिक ब्रह्मविद्या-उपदेश के बाद सन्यासी के आचार और अन्ततः आत्म-ब्रह्मज्ञान का विवेचन है।...

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भावनोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

भावनोपनिषद भावनोपनिषद् अथवा श्रीचक्रोपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् के रूप में उपलब्ध है।॥ भावनोपनिषद् ॥मंगलाचरणस्वाविद्यापदतत्कार्यं श्रीचक्रोपरि भासुरम् ।बिन्दुरूपशिवाक...

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रुद्रहृदयो उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रुद्रहृदयोपनिषद--रुद्रहृदयोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है और उपलब्ध पाठ में 52 मन्त्र/श्लोक हैं।॥ रुद्रहृदयोपनिषत् ॥मंगलाचरणयद्ब्रह्म रुद्रहृदयमहाविद्याप्रकाशितम्...

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गुरु गुड़ ही रहा चेला चीनी हो गया By Vandna Sharma

अक्टूबर का महीना था। सुबह-शाम की हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी थी। सूरज अभी-अभी क्षितिज के पार से झांका था और उसकी सुनहरी किरणें नदी के शांत जल पर तैर रही थीं।नदी के किनारे एक पेड़...

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योगकुण्डलिनी उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

योगकुण्डलिनी उपनिषद--योगकुण्डलिनी उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध योग-उपनिषद् है। परम्परागत पाठ में इसके 3 अध्याय और लगभग 171 मंत्र/श्लोक माने जाते हैं। इसमें प्राण, चित्त, मिताह...

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श्री राम की पूरी जीवन कथा - भाग 2 By Banwari Lal

श्रीराम की पूरी जीवन-कथा भाग 2 — पुत्रेष्टि यज्ञ और श्रीराम के जन्म की अद्भुत कथाजय श्रीराम पिछले भाग में आपने जाना कि किस प्रकार अयोध्या के राजा दशरथ अपने वंश और राज्य के भविष्य क...

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बनने से मिटने तक By Vedanta Life Agyat Agyani

  बनने से मिटने तक जीवन का मूल क्या है? कुछ बनने में—या हर क्षण मिटकर फिर बनने में? प्रकृति रोज मिटती है और रोज नई बनती है।पेड़ पुराने पत्ते छोड़ता है।नदी हर क्षण बदलती है।शरीर हर...

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भस्मोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

भस्मोपनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 96 वें स्थान पर आया है।भस्मोपनिषद् एक लघु शैव उपनिषद् है, जिसमें भस्म (विभूति) की महिमा, उसके निर्माण-विधि, धारण-विधि, मन्त्र तथा आध्यात्मिक महत्त...

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गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम By Vedanta Life Agyat Agyani

Philosophy of Non-Finality / गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम वेदांत 2.0 — अंतिम स्वतंत्रता घोषणादेखो — पर मानना आवश्यक नहींजीवन, स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष दर्शन का अदोगमैटिक दर्शन ल...

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भक्ति की शक्ति By Vandna Sharma

कहानी भक्ति की शक्ति लेखिका डॉ वंदना शर्मा किसी शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार रहता था। दुलार चंद और उनकी धर्मपत्नी ललिता देवी का बड़ा सा घर था। खेती की जमीन भी काफी थी। बस एक ही दु...

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रुद्राक्षोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रुद्राक्षोषनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 97वें स्थान पर आता है,रुद्राक्षोपनिषद् (रुद्राक्षजाबालोपनिषद्) अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् है, जिसमें रुद्राक्ष की उत्पत्ति, महत्त्व,...

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तारोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

(100) तारसारोपनिषद(100) तारसारोपनिषद-यह उपनिषद के क्रम में 100 वें स्थान पर आता है।सम्बन्ध: शुक्ल यजुर्वेदविषय: तारक-ब्रह्म, नारायण-मन्त्र, प्रणव और मोक्षमंगलाचरणयन्नारायणतारार्थसत...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 39 By Nitya Oswal

“प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥” गहरे अर्थ की व्याख्या (भाषाई गहराई के साथ)यह पंक्ति भगवान श्रीराम के...

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प्रतिक्रमन सूत्र - 3 By Ashish

🪷 अध्याय 20लोगस्स सूत्र — प्रत्येक गाथा का अर्थ एवं 24 तीर्थंकरों का आध्यात्मिक संदेश1. लोगस्स सूत्र का परिचयलोगस्स प्रतिक्रमण में पढ़ा जाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण स्तवन है। इसमें...

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गणपति उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

--(98)गणपति उपनिषद---यह उपनिषद के क्रम में 98 वेंस्थान पर आता है। गणपति उपनिषद्, जिसे सामान्यतः श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष या गणपति अथर्वशीर्ष कहा जाता है, गणपति को प्रत्यक्ष तत्त्व, आत्म...

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पन्चब्रह्मोनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किय...

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शतं इन्नु शरदो अन्ति देवा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सू्क्ति(55) की व्याख्या शतं इन्नु शरदो अन्ति देवाऋग्वेद --1/89/9भावार्थ--हे ईश्वर ! हम सौ वर्ष जिएँ। ऋग्वेद के इस मंत्र का पूरा पाठ इस प्रकार है—ऋग्वेद १.८९.९शतं इन्नु शरदो...

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पंचब्रह्मोषनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किय...

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स्वर्णिम राज्य का रहस्य - अध्याय 2 By Kahaniyon Ki lahar

"राजकुमारी नेत्र अपनी मां के कक्ष से निकलकर सीधे अपने पिता श्री के कक्ष में पहुंची।' जहां पर वेद ऋषि महाराज युद्ध बाण का उपचार कर रहे थे। महाराज अपने शाही पलंग पर लेट कर उन्हें...

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सत्य ही महत्वपूर्ण है। By Shivam Kumar Pandey

वचन, आज्ञाकारिता और एहसान से ऊपर सत्य लेखक: शिवम कुमार पाण्डेय© 2026 शिवम कुमार पाण्डेय1. पीपल के नीचे वचनबरगवाँ के बीचोंबीच एक पुराना पीपल था। उसी गाँव में माधव रहता था। बचपन से उ...

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मिट्टी का दीपक By sachit karmi

मिट्टी का दीपकवर्धमानपुर नाम का एक छोटा-सा नगर था। नगर के बाहर एक पुराना जिनालय था। सुबह होते ही वहाँ घंटियों की मधुर ध्वनि सुनाई देती और लोग भगवान महावीर के दर्शन के लिए पहुँचते।...

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गरुड़ोंपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : गरुड़ोपनिषद:---गरुड़ोपनिषद अथर्ववेद से संबद्ध वैष्णव उपनिषद् के रूप में सूचीबद्ध है। इसका मुख्य विषय विष-निवारण से संबंधित मंत्र हैं। वास्तविक सर्पदंश या विषाक्तता की स्थिति...

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श्री सौभाग्य लक्ष्मी उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

श्रीसौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् — सौभाग्योपनिषद् का प्रचलित पूर्ण नाम सौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् है। यह ऋग्वेदीय शाक्त उपनिषद् है और इसमें श्रीलक्ष्मी-विद्या, योग, समाधि तथा नवचक्रों का वर्...

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रावण की मृत्युशय्या By prem chand hembram

रावण की मृत्युशय्याज्ञान का अंतिम उपदेशलंका की धरती पर युद्ध की विभीषिका शांत हो चुकी थी।कुछ समय पहले तक जहाँ शंखनाद, धनुष की टंकार और योद्धाओं की गर्जना सुनाई दे रही थी, वहाँ अब ए...

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श्री सरस्वती रहस्योपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

श्रीसरस्वतीरहस्योपनिषद-- सरस्वती  रहस्य उपनिषद् को सामान्यतः कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् माना जाता है, न कि अथर्ववेद से। यह शाक्त उपनिषदों में गिना जाती है। १. शान्तिपा...

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मार्ग महानता का या, सहजता का? By yeash shah

          जीवन नश्वर है,हमारी चेतना प्राणमय प्रकृति है , जो सब में एक ही है। और वह ही हमारे जीवन की कुंजी है, और केंद्र है।                        पर हम बहारी विषयों में जीवन की प्...

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कलि संतरणोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

कलि-सन्तरण उपनिषद्--कलि-सन्तरण उपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् माना जाता है। इसमें कलियुग के दोषों से पार होने के उपाय के रूप में भगवान् के नाम-स्मरण का वर्णन है।१. प्रा...

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वह पुरानी घड़ी By Subhan Khan

वह पुरानी घड़ीशहर के एक पुराने मोहल्ले में सिया अपनी दादी के साथ रहती थी। उसके माता-पिता दूसरे शहर में नौकरी करते थे, इसलिए सिया को अपनी दादी के साथ ही रहना पड़ता था।दादी के पास एक...

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सत्य, शून्यता और काल By Vedanta Life Agyat Agyani

 सत्य, शून्यता और काल बुद्ध भिक्षापात्र लेकर खड़े होते हैं। उसका बाहरी अर्थ गरीबी या त्याग नहीं है। उसका संकेत अधिक गहरा है—“मेरा कुछ नहीं है, इसलिए मैं खाली हूँ।”लेकिन शायद मनुष्य...

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देवी उपपनिद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

देवी उपनिषद --देवी उपनिषद् (देव्युपनिषत् / देवी अथर्वशीर्ष) अथर्ववेदीय शाक्त उपनिषदों में प्रसिद्ध है। इसमें देवी को केवल किसी एक रूप की देवता न मानकर ब्रह्मस्वरूपिणी, प्रकृति, पुर...

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श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा - भाग 17 By Banwari Lal

श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा भाग 17 — अर्जुन का मोह और भगवद्गीताजय श्रीकृष्ण पिछले भाग में आपने जाना कि पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध रोकने के लिए श्रीकृष्ण ने अंतिम समय तक शांति का...

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कठरुद्रोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

कठरुद्रोपनिषद कठरुद्रोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध संन्यास-उपनिषद् है। उपलब्ध पाठ में आरम्भिक ब्रह्मविद्या-उपदेश के बाद सन्यासी के आचार और अन्ततः आत्म-ब्रह्मज्ञान का विवेचन है।...

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भावनोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

भावनोपनिषद भावनोपनिषद् अथवा श्रीचक्रोपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् के रूप में उपलब्ध है।॥ भावनोपनिषद् ॥मंगलाचरणस्वाविद्यापदतत्कार्यं श्रीचक्रोपरि भासुरम् ।बिन्दुरूपशिवाक...

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रुद्रहृदयो उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रुद्रहृदयोपनिषद--रुद्रहृदयोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है और उपलब्ध पाठ में 52 मन्त्र/श्लोक हैं।॥ रुद्रहृदयोपनिषत् ॥मंगलाचरणयद्ब्रह्म रुद्रहृदयमहाविद्याप्रकाशितम्...

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गुरु गुड़ ही रहा चेला चीनी हो गया By Vandna Sharma

अक्टूबर का महीना था। सुबह-शाम की हवा में हल्की ठंडक घुलने लगी थी। सूरज अभी-अभी क्षितिज के पार से झांका था और उसकी सुनहरी किरणें नदी के शांत जल पर तैर रही थीं।नदी के किनारे एक पेड़...

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योगकुण्डलिनी उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

योगकुण्डलिनी उपनिषद--योगकुण्डलिनी उपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध योग-उपनिषद् है। परम्परागत पाठ में इसके 3 अध्याय और लगभग 171 मंत्र/श्लोक माने जाते हैं। इसमें प्राण, चित्त, मिताह...

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श्री राम की पूरी जीवन कथा - भाग 2 By Banwari Lal

श्रीराम की पूरी जीवन-कथा भाग 2 — पुत्रेष्टि यज्ञ और श्रीराम के जन्म की अद्भुत कथाजय श्रीराम पिछले भाग में आपने जाना कि किस प्रकार अयोध्या के राजा दशरथ अपने वंश और राज्य के भविष्य क...

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बनने से मिटने तक By Vedanta Life Agyat Agyani

  बनने से मिटने तक जीवन का मूल क्या है? कुछ बनने में—या हर क्षण मिटकर फिर बनने में? प्रकृति रोज मिटती है और रोज नई बनती है।पेड़ पुराने पत्ते छोड़ता है।नदी हर क्षण बदलती है।शरीर हर...

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भस्मोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

भस्मोपनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 96 वें स्थान पर आया है।भस्मोपनिषद् एक लघु शैव उपनिषद् है, जिसमें भस्म (विभूति) की महिमा, उसके निर्माण-विधि, धारण-विधि, मन्त्र तथा आध्यात्मिक महत्त...

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गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम By Vedanta Life Agyat Agyani

Philosophy of Non-Finality / गति स्वभाव है, लक्ष्य मन का भ्रम वेदांत 2.0 — अंतिम स्वतंत्रता घोषणादेखो — पर मानना आवश्यक नहींजीवन, स्वतंत्रता और प्रत्यक्ष दर्शन का अदोगमैटिक दर्शन ल...

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भक्ति की शक्ति By Vandna Sharma

कहानी भक्ति की शक्ति लेखिका डॉ वंदना शर्मा किसी शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार रहता था। दुलार चंद और उनकी धर्मपत्नी ललिता देवी का बड़ा सा घर था। खेती की जमीन भी काफी थी। बस एक ही दु...

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रुद्राक्षोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रुद्राक्षोषनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 97वें स्थान पर आता है,रुद्राक्षोपनिषद् (रुद्राक्षजाबालोपनिषद्) अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् है, जिसमें रुद्राक्ष की उत्पत्ति, महत्त्व,...

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तारोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

(100) तारसारोपनिषद(100) तारसारोपनिषद-यह उपनिषद के क्रम में 100 वें स्थान पर आता है।सम्बन्ध: शुक्ल यजुर्वेदविषय: तारक-ब्रह्म, नारायण-मन्त्र, प्रणव और मोक्षमंगलाचरणयन्नारायणतारार्थसत...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 39 By Nitya Oswal

“प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥” गहरे अर्थ की व्याख्या (भाषाई गहराई के साथ)यह पंक्ति भगवान श्रीराम के...

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प्रतिक्रमन सूत्र - 3 By Ashish

🪷 अध्याय 20लोगस्स सूत्र — प्रत्येक गाथा का अर्थ एवं 24 तीर्थंकरों का आध्यात्मिक संदेश1. लोगस्स सूत्र का परिचयलोगस्स प्रतिक्रमण में पढ़ा जाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण स्तवन है। इसमें...

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गणपति उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

--(98)गणपति उपनिषद---यह उपनिषद के क्रम में 98 वेंस्थान पर आता है। गणपति उपनिषद्, जिसे सामान्यतः श्रीगणपत्यथर्वशीर्ष या गणपति अथर्वशीर्ष कहा जाता है, गणपति को प्रत्यक्ष तत्त्व, आत्म...

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पन्चब्रह्मोनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किय...

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शतं इन्नु शरदो अन्ति देवा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सू्क्ति(55) की व्याख्या शतं इन्नु शरदो अन्ति देवाऋग्वेद --1/89/9भावार्थ--हे ईश्वर ! हम सौ वर्ष जिएँ। ऋग्वेद के इस मंत्र का पूरा पाठ इस प्रकार है—ऋग्वेद १.८९.९शतं इन्नु शरदो...

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पंचब्रह्मोषनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है। इसमें भगवान् शिव के पाँच ब्रह्मस्वरूप—सद्योजात, अघोर, वामदेव, तत्पुरुष और ईशान—का निरूपण किय...

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स्वर्णिम राज्य का रहस्य - अध्याय 2 By Kahaniyon Ki lahar

"राजकुमारी नेत्र अपनी मां के कक्ष से निकलकर सीधे अपने पिता श्री के कक्ष में पहुंची।' जहां पर वेद ऋषि महाराज युद्ध बाण का उपचार कर रहे थे। महाराज अपने शाही पलंग पर लेट कर उन्हें...

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सत्य ही महत्वपूर्ण है। By Shivam Kumar Pandey

वचन, आज्ञाकारिता और एहसान से ऊपर सत्य लेखक: शिवम कुमार पाण्डेय© 2026 शिवम कुमार पाण्डेय1. पीपल के नीचे वचनबरगवाँ के बीचोंबीच एक पुराना पीपल था। उसी गाँव में माधव रहता था। बचपन से उ...

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मिट्टी का दीपक By sachit karmi

मिट्टी का दीपकवर्धमानपुर नाम का एक छोटा-सा नगर था। नगर के बाहर एक पुराना जिनालय था। सुबह होते ही वहाँ घंटियों की मधुर ध्वनि सुनाई देती और लोग भगवान महावीर के दर्शन के लिए पहुँचते।...

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गरुड़ोंपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

---- : गरुड़ोपनिषद:---गरुड़ोपनिषद अथर्ववेद से संबद्ध वैष्णव उपनिषद् के रूप में सूचीबद्ध है। इसका मुख्य विषय विष-निवारण से संबंधित मंत्र हैं। वास्तविक सर्पदंश या विषाक्तता की स्थिति...

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श्री सौभाग्य लक्ष्मी उपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

श्रीसौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् — सौभाग्योपनिषद् का प्रचलित पूर्ण नाम सौभाग्यलक्ष्म्युपनिषद् है। यह ऋग्वेदीय शाक्त उपनिषद् है और इसमें श्रीलक्ष्मी-विद्या, योग, समाधि तथा नवचक्रों का वर्...

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रावण की मृत्युशय्या By prem chand hembram

रावण की मृत्युशय्याज्ञान का अंतिम उपदेशलंका की धरती पर युद्ध की विभीषिका शांत हो चुकी थी।कुछ समय पहले तक जहाँ शंखनाद, धनुष की टंकार और योद्धाओं की गर्जना सुनाई दे रही थी, वहाँ अब ए...

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श्री सरस्वती रहस्योपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

श्रीसरस्वतीरहस्योपनिषद-- सरस्वती  रहस्य उपनिषद् को सामान्यतः कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शाक्त उपनिषद् माना जाता है, न कि अथर्ववेद से। यह शाक्त उपनिषदों में गिना जाती है। १. शान्तिपा...

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मार्ग महानता का या, सहजता का? By yeash shah

          जीवन नश्वर है,हमारी चेतना प्राणमय प्रकृति है , जो सब में एक ही है। और वह ही हमारे जीवन की कुंजी है, और केंद्र है।                        पर हम बहारी विषयों में जीवन की प्...

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कलि संतरणोपनिषद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

कलि-सन्तरण उपनिषद्--कलि-सन्तरण उपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध एक लघु उपनिषद् माना जाता है। इसमें कलियुग के दोषों से पार होने के उपाय के रूप में भगवान् के नाम-स्मरण का वर्णन है।१. प्रा...

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वह पुरानी घड़ी By Subhan Khan

वह पुरानी घड़ीशहर के एक पुराने मोहल्ले में सिया अपनी दादी के साथ रहती थी। उसके माता-पिता दूसरे शहर में नौकरी करते थे, इसलिए सिया को अपनी दादी के साथ ही रहना पड़ता था।दादी के पास एक...

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सत्य, शून्यता और काल By Vedanta Life Agyat Agyani

 सत्य, शून्यता और काल बुद्ध भिक्षापात्र लेकर खड़े होते हैं। उसका बाहरी अर्थ गरीबी या त्याग नहीं है। उसका संकेत अधिक गहरा है—“मेरा कुछ नहीं है, इसलिए मैं खाली हूँ।”लेकिन शायद मनुष्य...

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