अभी तक आपने पढ़ा कि बीना ने ख़ुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की, लेकिन इंस्पेक्टर दीक्षित ने उसे षड्यंत्र में शामिल मानकर गिरफ्तार कर लिया। इसी बीच अस्पताल से ख़बर आई कि रितु होश में आकर बार-बार बीना से मदद की गुहार लगा रही थी, जिससे बीना की साज़िश और भी उजागर हो गई। अब इसके आगे पढ़ें-
इंस्पेक्टर दीक्षित चाह रही थी कि किसी भी तरह से रितु के घर वालों का पता चल जाए। उनके बार-बार पूछने पर भी रितु अपने घर वालों का पता बताने के लिए किसी भी हालत में तैयार नहीं हो रही थी।
तब इंस्पेक्टर दीक्षित ने बड़े ही चिंतित स्वर में उसे समझाते हुए कहा, "रितु, ज़िद मत करो तुम्हारे घर फ़ोन तो करना ही पड़ेगा? वर्ना यहाँ तुम्हारा ख़्याल कौन रखेगा?"
रितु ने कहा, "बीना मैडम हैं न, वह रखेंगी।"
दोनों इंस्पेक्टर एक-दूसरे की तरफ़ हैरान होकर देखने लगे।
इंस्पेक्टर दीक्षित ने धीरे से कहा, "कितना विश्वास है इस बेचारी को उस बीना पर, जब इसे सच्चाई मालूम होगी तो पता नहीं क्या करेगी?"
इसी बीच जब उन्होंने बीना का फ़ोन खंगाला तो उन्हें पंकज का नंबर मिला।
नंबर मिलते ही इंस्पेक्टर दीक्षित ने तुरंत ही पंकज को फ़ोन लगाया।
फ़ोन की घंटी बजते ही पंकज ने फ़ोन उठाकर पूछा, "हेलो! कौन बोल रहा है?"
"मैं पुलिस इंस्पेक्टर दीक्षित बोल रही हूँ।"
पुलिस का नाम सुनते ही पंकज चौंक गया और उसने घबराते हुए पूछा, " जी इंस्पेक्टर मैडम, क्या बात है?
"पंकज इस समय तुम कहाँ हो?"
"जी मैं दो दिन के लिए अपने मम्मी-पापा से मिलने गाँव आया हूँ। जी आख़िर बात क्या है? मुझे बहुत डर लग रहा है।"
"सुनो पंकज, जितनी जल्दी हो सके तुम यहाँ वापस आ जाओ।"
"मैडम, जी? पर हुआ क्या है?"
"क्या तुम रितु को पहचानते हो?"
घबराते हुए पंकज ने कहा, "जी हाँ, क्या हुआ है उसे?"
"पंकज, उसका सामूहिक बलात्कार हुआ है।"
"क्या ...? आप यह क्या कह रही हैं?" ऐसा पूछते हुए पंकज एकदम निढाल होकर कुर्सी पर बैठ गया।
फिर उसने पूछा, "किसने किया यह? और रितु कैसी है?"
दीक्षित ने कहा, "रितु ठीक नहीं है पंकज। अभी-अभी होश में आई है। हमें पता चला है कि तुम उसके अच्छे दोस्त हो इसीलिए तुम्हें बुला रहे हैं, तुम जल्दी आ जाओ।"
इंस्पेक्टर दीक्षित की बात सुनकर पंकज की आँखों से आँसू बह निकले। वह रितु को बहुत प्यार करता था और अपने माता-पिता से अपनी शादी की बात करने के लिए ही गाँव आया था। यह ख़बर सुनते ही पंकज ने वापस शहर जाने का फ़ैसला कर लिया।
उसी समय वह अपना बैग भरने लगा। यह देखकर उसकी मम्मी ने पूछा, "पंकज यह क्या कर रहा है तू? अभी दो दिन पहले ही तो आया है और वापस जाने की तैयारी कर रहा है। तूने कहा था ना कि तू पूरा एक हफ्ते रुकेगा।"
पंकज ने कहा, "माँ बहुत ज़रूरी फ़ोन आया था, मुझे जाना ही होगा। मैं कुछ दिनों बाद फिर आ जाऊँगा।"
"पंकज बेटा तू बहुत चिंता में लग रहा है। क्या हुआ है?"
"कुछ नहीं माँ, बस मुझे जाना पड़ेगा।"
"अच्छा यह बता रितु से कब मिलवाएगा?"
"मिलवाऊँगा माँ ज़रूर मिलवाऊँगा।"
इसके बाद पंकज शहर के लिए निकल गया।
उधर, दीक्षित ने रितु के घर का नंबर भी बीना के मोबाइल से निकाल लिया।
यह एक लैंड लाइन फ़ोन का नम्बर था। उस पर इंस्पेक्टर दीक्षित ने फ़ोन लगाया और कहा, "हेलो।"
उस तरफ़ से रितु के भाई किशन ने फ़ोन उठाया और पूछा, "जी, कौन बोल रहा है?"
"हाँ जी, मैं पुलिस इंस्पेक्टर दीक्षित बोल रही हूँ। आप रितु के कौन हैं?"
"जी मैं उसका भाई हूँ। क्या हुआ है मेरी बहन को?"
"देखो पहले ये बताओ क्या नाम है तुम्हारा?"
"जी मेरा नाम किशन है।"
"तो देखो किशन, तुम्हें धैर्य से काम लेना होगा। तुम्हारी बहन का सामूहिक बलात्कार हुआ है।"
"क्या ...किसने किया यह? मैं उन्हें छोड़ूंगा नहीं!" किशन ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा।
"किशन, इस समय तुम्हारी बहन को परिवार की यानी तुम्हारी और तुम्हारे माता-पिता की ज़रूरत है। गुस्से में आकर कोई भी ग़लत क़दम उठाने से तुम लोगों का ही नुक़सान होगा।"
किशन ने पूछा, "वह कैसी है?"
"वह बिल्कुल ठीक नहीं है। तुम लोग जल्दी से आ जाओ।"
तभी किशन के पीछे खड़ी उसकी माँ बसंती ने यह सब कुछ सुन लिया और वह बेहोश होकर ज़मीन पर गिर पड़ी। किशन के पिता दूसरे कमरे से दौड़ते हुए आए तो देखा बसंती नीचे पड़ी कांप रही थी और किशन की आँखों से आँसू बह रहे थे। उन दोनों ने मिलकर बसंती को उठाया और उसे संभाला।
तब किशन के पिता रमन ने पूछा, "अचानक क्या हुआ तेरी माँ को?"
किशन रोते हुए बोला, "बाबूजी, सब कुछ बर्बाद हो गया ...सब ख़त्म हो गया है।"
✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
क्रमशः