Shadyantra - 2 in Hindi Crime Stories by Ratna Pandey books and stories PDF | षड्यंत्र - भाग 2

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षड्यंत्र - भाग 2

अभी तक आपने पढ़ा कि बीना की पार्टी में शराब और ड्रग्स का इंतज़ाम था। रितु नामक लड़की से झगड़े के बाद उसका बलात्कार हुआ और सी.सी.टी.वी. फुटेज व गवाहों के आधार पर इंस्पेक्टर दीक्षित बीना से सख़्त पूछताछ कर रही हैं। बीना लगातार आरोपों से इंकार करती है, लेकिन सबूत उसके खिलाफ़ हैं। अब इसके आगे पढ़ें-

इंस्पेक्टर के मुँह से सी.सी.टी.वी. की बात सुनकर बीना के होश उड़ चुके थे। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे।

इस तरह उसे चुप देखकर हवलदार ने बीना से कहा, "देखो, समय के महत्त्व को समझो और जल्दी ही जो पूछा जाए वह बता दो; वरना यह इंस्पेक्टर मैडम बहुत खतरनाक तरीके से सवाल पूछती हैं। सवालों के उत्तर के लिए केवल दो-चार मिनट ही देती हैं, वरना हाथों से काम लेना शुरू कर देती हैं। उनके धैर्य का फायदा मत उठाओ, बताओ क्या दुश्मनी थी उस लड़की से तुम्हारी?"

बीना ने डर के कारण अपना मुँह खोल ही दिया, उसने कहा, "दरअसल मैं पंकज से प्यार करती हूँ और वह भी उसी से प्यार करने लगी थी। इतनी बड़ी दुनिया में उसे और कोई नहीं मिला। वह मेरा जीवन उजाड़ना चाहती थी; इसलिए मैंने..."

इंस्पेक्टर ने पूछा, "इसीलिए तुमने क्या...?"

बीना ने कहा, "मैंने उसका जीवन उजड़वा दिया। अब पंकज उससे कभी प्यार नहीं करेगा ...प्यार नहीं तो शादी भी नहीं। अब पंकज सिर्फ़ मेरा होगा, सिर्फ़ मेरा।"

"तो क्या पंकज तुमसे प्यार करता है?"

बीना ने कहा, "यदि वह बीच में नहीं आती तो वह मुझसे ही प्यार करता, पर उसने बीच में आकर पूरा मामला बिगाड़ दिया।"

"क्या पंकज इस पार्टी में नहीं था?"

"जी नहीं, मैंने उसे बुलाया ही नहीं था।"

"क्यों नहीं बुलाया था? पंकज तो तुम्हारा बहुत ख़ास है; फिर उसे क्यों नहीं बुलाया और उस लड़की को बुला लिया?"

"उस लड़की को बुलाने की ज़रूरत ही नहीं थी।"

"क्यों? क्यों ज़रूरत नहीं थी?"

"क्योंकि वह मेरे घर काम करने आती है।"

"ओ माय गॉड! अच्छा, तो इसीलिए तुमने उसकी हैसियत और अपनी हैसियत देखकर यह घिनौना अपराध किया है और करवाया भी है। तो क्या पंकज एक काम वाली से प्यार करता है?"

बीना ने कहा, "हाँ, पंकज मेरे साथ मेरे घर आता रहता है और जब उसने रितु को देखा तो बस उसी दिन से वह उसका दीवाना हो गया। रितु बहुत ही ज़्यादा सुंदर है; उसका फिगर भी किसी हीरोइन से कम नहीं है। हम जिम में मर-मर कर पसीना बहाते हैं, तो भी उसकी तरह शरीर नहीं बन पाता, उसका तो बिना मेहनत के ही आकर्षक है। कम्बख्त के बाल भी बहुत सुंदर हैं; लंबी चोटी उसकी कमर के नीचे तक जाती है। बस इसी सब के कारण मेरा होने वाला पंकज मेरा न रह सका और वह रितु के दामन में जा बैठा। धीरे-धीरे पंकज मेरे बिना भी मेरे घर आने लगा।"

"क्या तुम्हारे घर में और कोई नहीं रहता?"

"जी इस समय मेरे पापा-मम्मी छह महीने के लिए मेरी दीदी के पास अमेरिका गए हुए हैं। अकेले में वे दोनों रंग-रैलियाँ मनाने लगे थे। फिर एक दिन जब मेरा शक पक्का हो गया तब मैंने उन्हें मेरे घर से साथ में बाहर जाते हुए देखा। वह कहाँ जा रहे हैं जानने के लिए मैंने उनका पीछा किया। मैंने देखा वे लोग एक होटल के कमरे में चले गए। मेरा खून खौल रहा था, मेरा बस चलता तो मैं कमरे का दरवाज़ा खुलवा कर वहीं उसका खून कर देती, पर ऐसे में तो मेरा पंकज मुझसे नाराज होकर नफ़रत करने लगता। इसीलिए मैंने खून का घूंट पी लिया और तभी से मैं हर रोज़ कोई न कोई उपाय सोचती रहती थी कि इस रितु को हमारे बीच से कैसे हटाऊँ? मुझे उसे इस तरह हटाना था कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।"

"इसीलिए तुमने ऐसी घिनौनी योजना बनाई?"

" जी हाँ इसीलिए मैंने यह योजना बनाई कि एक सामूहिक बलात्कार की पीड़ित लड़की से पंकज कभी भी शादी नहीं करेगा; और यदि वह उसे छोड़ देगा तो मेरा रास्ता साफ़ हो जाएगा। क्योंकि मैं जानती हूँ कि यदि वह पंकज को नहीं दिखती तो मैं ही उसकी महबूबा होती।

✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)
स्वरचित और मौलिक
क्रमशः