Shrapit ek Prem Kahaani - 12 in Hindi Spiritual Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | श्रापित एक प्रेम कहानी - 12

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 12

चतुर कहता है ----- 

चतुर :- तुम दोनो पागल हो । अब यहां रुक के क्या फ़ायदा । जल्दी निकलो यहां से वर्ना अब हमलोग सब गायब हो जाएंगे । क्यूंकी वो इसी जंगल में रहता है । ये उसकी का चाल है , हममे से कोई नही बचेगा ।



 एकांश गुस्से से कहता है ----

एकांश :- आखीर क्या कर लेगा कुम्भन यहां आके जो तुम सब इतना डर रहे हो । इतने साल हो गए क्या किसीने कुम्भन को देखा है ? ये सब बातें पुरानी हो चुकी है । अब यहां कोई नही रहता सिवाय तुम्हारे डर के।


तभी गुना कुछ बोलता उससे पहले एक भयानक आवाज वहां पर गूंजने लगा । वो आवाज इतनी तेज और भयानक थी के जिसे सुनकर सभी के रोंगटे खड़े हो गए ।

तभी आलोक घबराते हूए कहता है ----

आलोक :- यार लगता है ये आवाज कुम्भन की है । हमे यहां से निकलना होगा जल्दी । चलो यहां से ।


एकांश कुछ दैर हैरान होकर वही पर खड़ा था । तभी वो आवाज और तेज हो जाता है जैसै वो उन सबके करीब आ रहा हो । आलोक एकांश का हाथ पकड़ कर खिचते हूए कहता है ----


आलोक :- अरे चल जल्दी यहां से निकल , वो कभी भी हम तक पहूँच सकता है ।

एकांश आलोक के साथ वहां से निकलने लगता है । चतुर डर से कहता है ----


चतुर :- मैने पहले ही कहा था के ये उस महा देत्य कुम्भन का ही काम है , तुम लोग मेरी बात नही माने अब हम सब मारे जाएगें ।


आलोक :- चुपकर और जल्दी भागो यहां से ।



सभी जान लगा कर वहां से भागने लगता है , और वो आवाज भी उतनी ही तेजी से उनका पिछा कर रहा था , वो आवाज इतनी भयानक थी के मानो वो बहुत गुस्से मे था और उन्हें मार कर ही दं लेगा । वो आवाज अब और नजदीक आ गया था ।

तब आलोक भागते हूए कहता है -----


आलोक :- जल्दी करो , भागो जल्दी से , निकलो यहां से , वरना कल चौराहे पर हमारा कटा सर मिलेगा । 
चतुर और गुना डर से थर थर कांप रहे थे , और मुह मे राम राम किये जा रहा था ।

तभी एकांश पिछे मुड़कर दैखता है , जिसे दैखकर एकांश भी हैरान और डर जाता है , एकांश दैखता है पिछे कोई आ रहा था जो पेड़ो को ऐसे उखाड़कर फेंक रहा था जैसे कोई छोटी लकड़ी का टुकड़ा हो । कुछ पेड़ एकांश के तरफ भी हवा मे उड़कर आ रहा था जैसे वो इन लोगो मारने के लिए इनलोगो की और फेंक रहा हो । एकांश आलोक और गुना को बचाते हूए कहता है ---- 



एकांश :- आलोक , गुना बचो । 



एकांश दोनो को एक तरफ कर देता है जिससे वो पेड़ से बच जाता है । कुम्भन ऐसे बहोत सारे पेड़ उन लोगो को मारने के लिए फेंकता है , पर वो सभी उन पेड़ो से बचते हूए जंगल से बाहर आ जाते है ।

एकांश और बाकी सभी जंगल के बाहर आके रुक जाता है क्योकी उन्हें पता था के कुम्भन जंगल से बाहर नही आ सकता है ।



तभी वो भयानक आवाज और करीब से आता है मानो वो कुम्भन उनके सामने ही हो । सभी उस भयानक को आवाज को सुनकर थर थर कांपने लगता है । फिर धिरे धिरे वो आवाज उन सब से दुर जाने लगता है । और फिर कुछ दैर बाद वो आवाज आना बंद हो जाता है ।



चतुर हंफते हूए कहता है -----


चतुर :- उफ्फ ! भगवान तेरा लाख लाख शुक्रिया, आज तो बाल बाल बच गए । अब चलो यार यहां से जल्दी , वरना वो फिर आ जाएगा । 


चतुर की बात पर सभी वहां से चला जाता है और एक चाय की दुकान पर जाकर बैठ जाता है और सभी के लिए एक एक कप चाय का ऑडर दे देता है ।

एकांश अभी भी उसी आवाज के बारे मे सौच रहा था , उसे भरोसा नही हो रहा था के इतना भयानक से वो लोग बच के आ गया है । 

एकांश को अपने किए पर बुरा भी लग रहा था क्योकी उसी ने सबको उस जंगल मे जाने के लिए कहा था । 


एकांश आलोक और बाकी सभी से कहता है ----



एकांश :- यार तुम सब हो सके तो मुझे माफ करदो यार , आज मेरे वजह से तुम लोग बहोत मुसीबत मे फंस गए थे । 


तभी आलोक कहता है -----


आलोक :- यार कैसी बात कर रहा है , दोस्ती मे सॉरी कैसी और वैसे भी तुझे थोड़ी ना पता था के ऐसा कुछ होने वाला है । तु जानबुझकर तो हमारे साथ ऐसा करेगा भी नही ।


आलोक के बात को सुनकर एकांश को थोड़ी राहत मिलती है ।
एकांश आलोक से पूछता है ---


एकांश :- यार आलोक ये क्या था यार , इतना भयानक आवाज और वो पेड़ को ऐसे उखाड़ रहा था जैसे के कोई खिलोना हो । मैने तो उसके बारे मे सिर्फ सुना था पर आज जाना के कुम्भन सच मे है ।


आलोक :- पर इन कुछ सालो मे जो हूआ क्या तुझे उस बारे मे कुछ भी नही पता ।


एकांश :- नही यार मुझे तो बिल्कुल भी नही पता के यहां क्या हूआ है और वो कुम्भन इस जंगल मे कैसे आया है ।


आलोक :- यार मुझे तो लगा था के तुझे कुम्भन के बारे मे पता है ।

एकांश :- मुझे सिर्फ इतना पता है के इस जंगल मे कुम्भन नाम का एक दैत्य रहता है पर वो यहां क्यो और कैसे आया ये नही पता था । पर जो सुना वो क्या था यार ।


गुना गुस्से से कहता है ----


गुना :- ये कुम्भन था एकांश । हमलोगो ने कितना मना किया के वहां पर मत जाओ । पर तुने हमारी एक बार भी बात नही मानी । दैख लिया ना जंगल जाने का नतीजा, मरते मरते बचे है सब ।



आलोक गुना की बात पर सहमती जताते हूए कहता है ----

आलोक :- हां यार गुना ठिक बोल रहा है । वो कुम्भन बहोत ही निर्दयी और खतरनाक है , 10 साल पहले की बात है , जब तु यहां से पड़ाई के लिए गया था । तुझे ये तो पता था के कुम्भन नाम देत्य इस जंगल मे रहता है । पर वो क्यो और कब आया ये नही पता ।


एकांश :- हां यार , यहां देत्य ये बात तो सुनी थी , पर मुझे नही पता के वो कब और क्यों आया है । जब मैं यहां से पढ़ाई करने के लिए बाहर गया तब संपूर्णा ने मुझे एक बार कॉल करके बताया था , के जंगल मे देत्य फिर से सबको मारने लगा है । पर यार एकल बात बता ये दैत्य इस कलयुग मे कहां से आ गया । मैने पुराणों मे दैत्यों के बारे मे पड़ा था के दैत्य होते है , पर वो सब तो अपने लोक मे चले गए थे पर अब वो इस युग मे क्यूं आया ?


आलोक :- पुराणों मे तो मैने भी पड़ा है के दैत्य , राक्षस और दानव और सभी अपनी लोक मे रहते है , और ये भी पड़ा था के देवता और दैत्यों मे एक संधी हूआ था के वो फिर कभी पृथ्वी वासियों को परेशान नही करेगें और ना ही मारेगें ।


To be continue....142