Garbha Sanskar - 9 in Hindi Women Focused by Praveen Kumrawat books and stories PDF | गर्भ संस्कार - भाग 9 - एक्टिविटीज–08

Featured Books
Categories
Share

गर्भ संस्कार - भाग 9 - एक्टिविटीज–08

प्रार्थना:
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे
हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे
हम है अकेले, हम है अधूरे
तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी
वेदों की भाषा, पुराणों की बानी
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने
विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू श्वेतवर्णी, कमल पर विराजे
हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे
मन से हमारे मिटाके अँधेरे
हमको उजालों का संसार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥

अर्थः हे देवी! आप सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान हैं। आपको बार-बार नमन।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु, मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ भौतिक गुणों की याद दिला रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार हैं।

— परम तेजस्वी ईश्वर का अंश होने के कारण तुम्हारे मुख पर सूर्य के समान दिव्य तेज और ओज रहता है।

— तुम्हारे नैन-नक्श तीखे और बहुत सुन्दर है, तुम्हारा सुन्दर मुखड़ा सबको बहुत प्यारा लगता है।

— तुम्हारे चेहरे का रंग गोरा और सबका मन मोह लेने वाला है।

— तुम्हारी हर अदा सुन्दरतम ईश्वर की झलक लिए हुए है, तुम्हारा माथा चौड़ा है, तुम्हारी आँखें बड़ी है, तुम्हारी भौहें तीर के आकार की तरह बड़ी है, तुम्हारी पलकें काली और बड़ी हैं।

— तुम्हारे होंठ फूल की तरह कोमल और सुन्दर हैं, तुम्हारे चेहरे पर हर पल एक मधुर मुस्कान छाई रहती है।

— तुम्हारी बुद्धि कुशाग्र है, तुम्हारी वाणी मधुर और सम्मोहन करने वाली है।

— तुम बहुत अच्छे खिलाडी हो, तुम्हारा शरीर तंदुरुस्त और फुर्तीला है। (किसी विशेष खेल के प्रति शिशु के मन में प्रतिभा विकसित करनी हो तो यहाँ कह सकते हैं)

— तुम बहुत सुंदर दिखते हो, बड़े होने पर भी तुम्हारी सुंदरता और निखरती जाएगी।

— तुम्हारी हर अदा बहुत निराली और अनोखी है।

— घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है। तुम्हारे रूप में मुझे जैसे दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, तुम्हे पाकर में बहुत प्रसन्न हूँ, जल्द ही इस सुन्दर संसार में तुम्हारा आगमन होगा। तुम्हारा स्वागत करने के लिए सभी बेचैन है।

गर्भ संवाद:
“मेरे प्यारे बच्चे! श्रद्धा और विश्वास से जीवन में हर समस्या का समाधान हो जाता है। जब तुम भगवान में विश्वास रखते हो और श्रद्धा से उनके मार्ग पर चलते हो, तो जीवन की हर समस्या आसान हो जाती है। भगवान कभी भी अपने भक्त को अकेला नहीं छोड़ते, उनका हाथ हमेशा तुम्हारे साथ होता है। जीवन में जितना अधिक तुम भगवान पर विश्वास करोगे, उतना ही तुम्हारा मन शांत और स्थिर रहेगा। मैं चाहती हूं कि तुम हमेशा श्रद्धा और विश्वास से जीवन में आगे बढ़ो।”

पहेली: 
काले वन की रानी है, 
लाल-पानी पीती है।

कहानी: पुत्र का कर्तव्य
प्राचीन भारत में एक छोटे से गाँव में एक राजा रहते थे। उनका नाम राजा विक्रम था। वह एक न्यायप्रिय और समझदार राजा थे, लेकिन उनके जीवन में एक दुख था। उनका एक ही पुत्र था, जिसका नाम वीर था। वीर एक साहसी और शक्तिशाली युवक था, लेकिन उसमें जिम्मेदारी की भावना की कमी थी। उसे हमेशा अपनी शक्ति और साहस पर गर्व था, लेकिन अपने कर्तव्यों का पालन करने में वह अनिच्छुक था।

एक दिन, राजा विक्रम ने वीर से कहा, “बेटा, तुम्हारा समय आ गया कि तुम अपनी जिम्मेदारी समझो और हमारे राज्य की सेवा करो। तुम्हे केवल युद्ध में ही नहीं, बल्कि लोगों की भलाई में भी अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा।”

वीर ने अपने पिता की बातों को सुना, लेकिन वह हमेशा अपने साहस और शक्ति की बात करता रहा। उसे लगता था कि कर्तव्य केवल युद्ध में लड़ने तक ही सीमित है।

फिर एक दिन गाँव में एक बड़ा संकट आया। एक शक्तिशाली बर्बर सेना ने राज्य पर हमला किया। राजा विक्रम ने वीर को युद्ध में जाने के लिए आदेश दिया। वीर युद्ध ने युद्ध में भाग लिया और उसने शौर्य से युद्ध किया, लेकिन उसकी वीरता के बावजूद राज्य की हालत बिगड़ने लगी। बर्बर सेना बहुत मजबूत थी और वीर को युद्ध में असफलता का सामना करना पड़ा। 

राजा विक्रम ने इसे समझा और वीर से कहा, “बेटा, तुम्हारे साहस का कोई मोल नहीं है यदि तुम अपने कर्तव्यों को समझकर सही रास्ते पर नहीं चल रहे हो। तुम्हें केवल युद्ध में जीतने से ही नहीं, बल्कि राज्य के नागरिकों की भलाई के लिए भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।”

वीर ने अपने पिता की बातों को गंभीरता से सुना और समझा। उसने राज्य की जनता की सेवा करने का प्रण लिया। वीर ने युद्ध में अपनी वीरता को सिर्फ अपनी शक्ति दिखाने के रूप में नहीं, बल्कि अपने राज्य की सुरक्षा और कल्याण के लिए इस्तेमाल किया। उसने अपनी शक्ति को लोगों के भले के लिए लगाया और राज्य को पुनः समृद्ध बनाया।

कई वर्षों बाद, जब राजा विक्रम का निधन हुआ, तो वीर ने अपने पिता की शिक्षा को अपने जीवन का मूलमंत्र माना। उसने राज्य की सेवा करते हुए अपने पिता के कर्तव्यों का पालन किया और एक आदर्श राजा के रूप में अपनी पहचान बनाई।

शिक्षा
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि कर्तव्य का पालन सिर्फ बाहरी शौर्य और युद्ध में नहीं, बल्कि समाज और परिवार की सेवा में भी होता है। पुत्र का कर्तव्य है कि वह न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी अपनी जिम्मेदारियाँ समझे और निभाए। कर्तव्य का पालन आत्मिक संतुष्टि और समाज के प्रति सच्ची निष्ठा का प्रतीक होता है।

पहेली का उत्तर : खटमल /जुआं/जूं
======================== 53

प्रार्थना:
हे न्यायाधीश प्रभु! आप हमे काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, शोक, आलस्य, प्रमाद, ईर्ष्या, द्वेष, विषय-तृष्णा, निष्ठुरता आदि दुर्गुणों से मुक्त कर श्रेष्ठ कार्य में ही स्थिर करें हम अतिदिन होकर आपसे यही मांगते हैं कि हम आप और आपकी आज्ञा से भिन्न पदार्थ में कभी प्रीति ना करें।

मंत्र:
ॐ आदित्याय विद्महे। 
भास्कराय धीमहि। 
तन्नो: भानु: प्रचोदयात्॥

अर्थ: मैं सूर्य देवता को नमन करता हूं। हे प्रभु, दिन के निर्माता, मुझे बुद्धि दो और मेरे मन को प्रकाशित करो

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ ‍ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ महानतम गुणों की याद दिला रही रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार है।

— मेरे बच्चे! तुम्हारे मस्तिष्क में अपार क्षमता है। तुम्हारी बुद्धि तीव्र है।

— तुम आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक जैसी क्षमता लेकर आ रहे हो। तुममे कठिन से कठिन समस्या को सुलझाने की योग्यता है।

— तुम रामानुजन जैसी गणित के सवालों को हल करने की क्षमता रखते हो।

— विवेकानंद जैसी महान प्रतिभा है तुममें।

— तुम्हारी याददाश्त बहुत अच्छी है, जो बात तुम याद रखना चाहो तुम्हें सदा याद रहती है।

— तुम्हारी एकाग्रता कमाल की है। जिस काम पर तुम फोकस करते हो उसमें बेहतरीन परिणाम लेकर आते हो।

— कोई भी विषय, कोई भी टॉपिक तुम्हारे लिए कठिन नहीं, हर विषय को अपनी लगन से, परिश्रम से तुम सरल बना लेते हो।

— तुम्हारे भीतर अनंत संभावनाएं छुपी हुई है।

— तुम्हें म्यूजिक का बहुत शौक है, तुम सभी वाद्य यंत्र बजाना जानते हो। ढोलक, गिटार, तबला, हारमोनियम, तुम बहुत अच्छे से बजा सकते हो।

— तुम्हारा दिमाग बहुत तेज चलता है। मुश्किल से मुश्किल समस्या का भी तुम बड़ी आसानी से हल निकाल लेते हो।

— तुम्हारी वाणी में मिठास है। तुम एक बहुत अच्छे गायक हो। जब तुम गाते हो तो सभी मंत्रमुग्ध हो जाते है।

— तुम्हें पढ़ाई में सभी सब्जेक्ट अच्छे लगते है। जो भी पढ़ते हो बड़ी आसानी से याद हो जाता है।

गर्भ संवाद:
“ध्यान और साधना से हमें आत्मिक शांति मिलती है। जब तुम अपने मन को शांत करते हो और ध्यान में खो जाते हो, तो तुम अपने भीतर की ऊर्जा और शक्ति को महसूस कर सकते हो। यह शांति तुम्हें जीवन की जटिलताओं से ऊपर उठाकर सच्चे सुख की ओर मार्गदर्शन करती है। मैं चाहती हूं कि तुम ध्यान और साधना के माध्यम से अपनी आत्मा से जुड़ो, क्योंकि यही तुम्हें भीतर से संतुष्टि और शांति देगा।”

पहेली:
अपनों के ही घर ये जाये, 
तीन अक्षर का नाम बताये। 
शुरू के दो अति हो जाये, 
अंतिम दो से तिथि बताये।

कहानी: असंभव कुछ भी नहीं
एक छोटे से गाँव में एक लड़का रहता था, जिसका नाम अजय था। अजय बहुत ही साधारण परिवार से था, और उसकी परिस्थितियाँ भी उतनी ही कठिन थीं। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन उसकी राह में आने वाली मुश्किलें और चुनौतियाँ उसे परेशान करती थीं।

अजय का सपना था कि वह अपने गाँव का नाम रोशन करेगा, लेकिन उसके पास वह सभी सुविधाएँ नहीं थीं, जो बड़े शहरों में लोगों को मिलती थीं। उसके पास एक साधारण सी स्कूल शिक्षा थी, और उसे कोई बड़ा अवसर नहीं मिल पा रहा था। गाँव में रहने वाले लोग भी उसे अक्सर ताने मारते और कहते, “तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता, तुम जैसे लोग कभी कुछ बड़ा नहीं कर सकते।”

लेकिन अजय ने कभी हार नहीं मानी। वह जानता था कि अगर उसने अपनी मेहनत और आत्मविश्वास को बनाए रखा, तो किसी भी मुश्किल का हल निकाला जा सकता है। उसे यकीन था कि “असंभव कुछ भी नहीं।” 

वह रोज़ सुबह जल्दी उठकर मेहनत करता था। उसे जो भी काम मिलता, चाहे वह खेतों में काम हो, घर का काम हो या गाँव में छोटी मोटी नौकरियाँ हो, अजय किसी भी काम को हल्के में नहीं लेता था। वह जानता था कि एक दिन उसकी मेहनत रंग लाएगी।

एक दिन गाँव में एक बढी प्रतियोगिता हुई, जिसमें बहुत सी शैक्षिक और खेल गतिविधियाँ थीं। अजय ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लेने का निर्णय लिया। पहले तो बहुत से लोग हंसे और कहा, “तुम जैसे लड़के को जीतने का क्या अधिकार है?” लेकिन अजय ने किसी की नहीं सुनी और प्रतियोगिता में भाग लिया।

अजय ने अपनी पूरी मेहनत और समर्पण के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उसका आत्मविश्वास उसकी मेहनत से कहीं ज़्यादा था। प्रतियोगिता के अंत में अजय ने सबको चौंका दिया। उसने न केवल अपनी कड़ी मेहनत से प्रतियोगिता जीती, बल्कि साबित भी किया कि “असंभव कुछ भी नहीं।”

आज, अजय गाँव का एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बन चुका था। उसकी सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर दिल में संकल्प हो और मेहनत सही दिशा में हो, तो कोई भी मुश्किल असंभव नहीं होती।

शिक्षा
इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि अगर आपके मन में किसी लक्ष्य को पाने का दृढ़ संकल्प हो, तो कोई भी मुश्किल असंभव नहीं होती। मुश्किलें हमारी ताकत को परखने का एक तरीका होती हैं, और सही दिशा में मेहनत करने से हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि अंततः मेहनत और आत्मविश्वास से हम किसी भी मंजिल तक पहुँच सकते हैं।

पहेली का उत्तर : अतिथि
========================== 54

गीता सार:
क्यों व्यर्थ चिन्ता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा न पैदा होती है, न मरती है । 
 
जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाये थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर आये, जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं से दिया। जो लिया इसी (भगवान) से लिया। जो दिया, इसी को दिया। खाली हाथ आए, खाली हाथ चले। जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, परसों किसी और का होगा। तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। बस यह प्रसन्नता ही तुम्हारे दुःखों का कारण है।

परिवर्तन ही संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ो के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया मन से मिटा दो, विचार से हटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।

न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है और इसी में मिल जायेगा। परन्तु आत्मा स्थिर है, फिर तुम क्या हो? तुम अपने आपको भगवान् के अर्पित करो। यह सबसे उत्तम सहारा है। जो इसके सहारे को जानता है, वह भय, चिन्ता शोक से सर्वदा मुक्त है। 

जो कुछ तू करता है, उसे भगवान को अर्पण करता चल। इसी में तू सदा जीवन-मुक्त अनुभव करेगा।

मंत्र: 
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात्' 

अर्थ: हे भगवान वासुदेव, मुझे उच्च बुद्धि प्रदान करो और भगवान विष्णु मेरे मन को प्रकाशित और प्रबुद्ध करें।

गर्भ संवाद
“मेरे बच्चे! ईश्वर की उपासना से न केवल आत्मिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में समृद्धि भी आती है। जब तुम सच्चे मन से ईश्वर की पूजा करते हो, तो वह तुम्हें न केवल भौतिक, बल्कि मानसिक और आत्मिक समृद्धि भी प्रदान करते हैं। जीवन में किसी भी प्रकार की कमी या कठिनाई आने पर ईश्वर की उपासना और भक्ति तुम्हारे लिए मार्गदर्शक बनती है। मैं चाहती हूं कि तुम हमेशा ईश्वर से जुड़ने का प्रयास करो, क्योंकि वह तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति हैं।”

पहेली:
खाते नहीं चबाते लोग, 
काठ में कड़वा रस संयोग। 
दांत जीभ की करे सफाई 
बोलो बात समझ में आई।

कहानी: हर मुश्किल का हल है
एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक लड़का रहता था, जिसका नाम राकेश था। राकेश का जीवन बहुत ही कठिन था। उसके पास कोई बड़ा अवसर नहीं था, लेकिन उसकी एक खास बात थी, जो उसे दूसरों से अलग करती थी। राकेश को कभी भी मुश्किलों से भागने की आदत नहीं थी। वह मानता था कि हर मुश्किल का हल है, बस उसे सही तरीके से हल करना चाहिए।

राकेश का सपना था कि वह एक दिन बड़ा आदमी बनेगा, लेकिन उसकी परिस्थितियाँ उसकी राह में रुकावट बन रही थीं। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी, और उसके पास पढ़ाई के लिए पैसे भी नहीं थे। लेकिन राकेश ने कभी हार नहीं मानी। वह जानता था कि हर मुश्किल का हल है, बस उसे धैर्य और समझ से काम लेना चाहिए।

राकेश ने खुद को किसी भी परिस्थिति में अवसादित नहीं होने दिया। उसने तय किया कि वह अपनी कठिनाइयों का सामना करेगा और कुछ बड़ा करेगा। वह अपने गाँव के छोटे स्कूल में पढ़ाई करता था, लेकिन स्कूल के बाद वह खेतों में काम करता था। यह काम उसे बहुत कठिन लगता था, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की। वह जानता था कि ये छोटी-छोटी मेहनत ही उसे उसके लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करेंगी।

एक दिन गाँव में एक बड़ा अवसर आया। गाँव के पास एक बड़ी कंपनी ने अपनी शाखा खोलने का निर्णय लिया था और इसके लिए अच्छे कर्मचारियों की तलाश थी। राकेश ने यह अवसर अपने हाथ से नहीं जाने दिया। उसने अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ काम किया और कुछ समय बाद उसे कंपनी में नौकरी मिल गई। यह उसकी कड़ी मेहनत और धैर्य का परिणाम था।

अब राकेश अपने परिवार की मदद करता था और साथ ही अपने गाँव का नाम भी रोशन कर रहा था। उसका जीवन बदल चुका था। उसने साबित कर दिया था कि हर मुश्किल का हल है, बस उसे सही दिशा में प्रयास करना चाहिए।

शिक्षा
इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि जीवन में कभी भी कोई समस्या स्थायी नहीं होती। हर मुश्किल का हल है, और अगर हम उसे सही तरीके से हल करने का प्रयास करें, तो हमें सफलता मिल सकती है। कठिनाइयाँ हमें केवल परखने का एक तरीका होती हैं, और अगर हम उन्हें सही नजरिए से देखें, तो हम हर समस्या का समाधान पा सकते हैं।

पहेली का उत्तर : दांतुन
=====================55

प्रार्थना:
सभी सुखी हो, सबका मंगल हो, सबका कल्याण हो, सबका दुःख दुर हो, सबका वैर शांत हो। इस संसार मे रहने वाले सारे प्राणियो की पीड़ा समाप्त हो वे सुखी और शांत हो। चाहे वे जीव जल मे रहने वाले हो या स्थल मे या फिर गगन मे रहने वाले। सभी सुखी हो। इस पूरे ब्रह्माण्ड मे सभी दृश्य और अदृश्य जीवो का कल्याण हो। बह्मांड मे रहने वाले सभी जीव और प्राणी सुखी हो वे पीड़ा से मुक्त हो।

मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे। 
महादेवाय धीमहि। 
तन्नो: शिवः प्रचोदयात्॥

अर्थः हे महादेव! आप हमें सन्मार्ग और ज्ञान का प्रकाश दें।

गर्भ संवाद
“मेरे प्यारे बच्चे! सत्य ही सबसे बड़ी शक्ति है। जब तुम जीवन में सत्य के मार्ग पर चलते हो, तो भगवान तुम्हारे साथ होते हैं। सत्य के रास्ते में आने वाली कोई भी कठिनाई तुम्हें हरा नहीं सकती, क्योंकि भगवान का आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ होता है। तुम्हारी सच्चाई ही तुम्हारी शक्ति है, और यही तुम्हें हर परीक्षा में पार कराती है। मैं चाहती हूं कि तुम सच्चाई से कभी भी न भटको, क्योंकि सत्य के मार्ग पर चलने से भगवान का साथ हमेशा तुम्हारे साथ रहता है।”

पहेली:
काला मुँह लाल शरीर, 
कागज को वह खाता 
रोज शाम को पेट फाड़कर कोई उन्हें ले जाता।

कहानी: गणेश चतुर्थी का चमत्कार
गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन, गणेश जी की पूजा की जाती है और उनकी उपासना से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। लेकिन एक बार, एक छोटे से गाँव में एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसने सबको हैरान कर दिया और सबकी आस्था को और भी मजबूत कर दिया।

वह गाँव था जहाँ लोग सादगी से रहते थे और जीवन में बहुत मुश्किलें थीं। एक छोटा सा परिवार था— रामू और उसकी पत्नी सोनी। रामू गरीब था, लेकिन उसके दिल में आस्था और ईमानदारी की कोई कमी नहीं थी। उसके पास बहुत सारी भौतिक चीजें नहीं थीं, लेकिन उसका विश्वास था कि भगवान उसकी मदद जरूर करेंगे।

गणेश चतुर्थी का पर्व करीब आ रहा था, और रामू ने तय किया कि इस बार वह अपने घर में गणेश जी की पूजा करेगा। हालांकि, उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह एक बड़े गणेश जी की मूर्ति खरीद सके। फिर भी, उसने जो भी थोड़ा बहुत बचत किया था, उसी से गणेश जी की छोटी सी मूर्ति खरीदी। सोनी ने घर को साफ किया और मंदिर की तरह सजाया।

पूजा का दिन आया। रामू और सोनी ने पूरे मन से गणेश जी की पूजा की। दोनों ने अपने कष्टों और समस्याओं से मुक्ति की प्रार्थना की, और भगवान से सिर्फ एक ही अनुरोध किया—

“हे गणेश जी, हमारे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास हो, और हमें अपनी मेहनत का फल मिले।”

पूजा के बाद, रामू ने मूर्ति को घर में रखा और सोनी ने उसका ध्यान रखा। अगले कुछ दिनों में एक अजीब सा बदलाव महसूस होने लगा।

रामू के पास कुछ छोटे-मोटे काम आने लगे। वह पहले जिस काम को करने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाता था, अब वही काम बिना किसी मदद के उसे मिल रहे थे। उसकी मेहनत रंग लाने लगी, और उसे कुछ ऐसे मौके मिले जो पहले कभी नहीं आए थे। उसकी आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। धीरे-धीरे उसके पास इतने पैसे आ गए कि उसने अपनी छोटी सी झोपड़ी को एक अच्छे घर में बदल लिया।

लेकिन इसका सबसे बड़ा चमत्कार हुआ, जब गणेश चतुर्थी के अगले साल रामू ने फिर से गणेश जी की पूजा की। इस बार, न केवल उसकी व्यक्तिगत स्थिति सुधरी, बल्कि गाँव में और भी लोग उसके पास मदद के लिए आने लगे। उसे और उसकी पत्नी को गाँव के लोग एक उदाहरण के रूप में देखने लगे।

कहा जाता है कि गणेश जी की उपासना से केवल धन ही नहीं मिलता, बल्कि घर में शांति और प्रेम भी आता है। रामू और सोनी की कहानी इस बात का प्रमाण बन गई। यह सिर्फ एक भौतिक सुधार नहीं था, बल्कि उनके जीवन में एक आंतरिक शांति और संतोष भी आया।

शिक्षा
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि ईमानदारी, आस्था, और मेहनत से कोई भी कठिनाई दूर की जा सकती है। गणेश जी की पूजा से हम सिर्फ बाहरी सुख नहीं पाते, बल्कि आंतरिक संतोष और शांति भी प्राप्त करते हैं। हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि भगवान हमारे संघर्षों को समझते हैं और सही समय पर हमारी मदद करते हैं। जब हम अपने कार्यों में ईमानदार होते हैं और सच्चे दिल से भगवान से मदद माँगते हैं, तो चमत्कार सच में होते हैं।

पहेली का उत्तर : लेटर बॉक्स
=======================56