भीड़ में किसी का पहचानना भी
तसल्ली का काम करता है,
खासियत के कुछ पन्नों में
खुद का नाम करता है,
नसीब से ही मिलते हैं
उम्र भर साथ चल सकने वाले,
वरना,
भीड़ में तो हज़ारों कदमों का जाल रहता है,
ज़रूरी नहीं,
हमारी तस्वीर में खड़ा साथ मुस्कुराने वाला हर शख्स हमारा अपना हो,
कभी-कभी,
तस्वीर में कभी ना दिखने वाला भी उम्र भर हमारे साथ रहता है !!!!