साँसों की टूटी माला है, और आख़िरी ये रात है
होंठों पर बस एक सिसकी, और अधूरी बात है।
ज़िंदगी की इस दहलीज़ पर, मौत खड़ी मुस्काती है,
पर तुझको न पा पाने की तड़प, इस जान को ले जाती है।
देखा था जो एक ख़्वाब मिलकर, वो काँच सा चूर हुआ,
किस्मत का कैसा खेल देखो, तू मुझसे कितना दूर हुआ।