कौन आएगा?
केशव ऑपरेशन थिएटर के मुख्य द्वार पर खड़ा हुआ था, जहां पर आंखों का ऑपरेशन हो रहा था। जिस जिसका ऑपरेशन समाप्त हो रहा था उस मरीज को पैरामेडिकल स्टाफ बाहर लेकर आ जाते। वे भी मरीज को केवल दरवाजे तक छोड़कर चले जाते। यह समझकर कि उनका कोई भाई बंधु यहां से आराम कक्ष तक ले जाएगा। परंतु कभी-कभी किसी का कोई भी भाई बंधु लेने नहीं आता था।
अचानक मेरी नजर एक बुजुर्ग पर पड़ी जिसको पैरामेडिकल स्टाफ दरवाजे तक छोड़कर चला गया। बुजुर्ग ने 1, 2 मिनट के लिए इधर-उधर देखा है कि शायद कोई उसका रिश्तेदार उसे पकड़ कर लेने आएगा और आराम कक्ष में छोड़ देगा। परंतु ऐसा हुआ नहीं। इससे पहले कि मैं उसकी सहायता करने जाउं बुजुर्ग अपने आप ही 50 कदम दूर आराम कक्ष तक चला गया।
कौन आता?
सुर नर सब की यह रीति स्वारथ लाग करें सब प्रीति प्रीति।
सवाल पैदा होता है कौन किसका है। समाज तो टूट गया और अब परिवार भी टूट गया। बाल बच्चे दूर-दूर रहने लगे और माता पिता उसी घर में अकेले रहेंने लगे। हम भी उसी में से थे जो ऑपरेशन के लिए अकेले गए थे। यह सोचकर की शायद कोई आएगा मिलने या देखने के लिए आयेगा, शायद झूटा इंतजार कर रहे थे। संध्या हो गई, ओपरेशन भी समाप्त हो गया, कोई नहीं आया!
जैसे ही हमारी पत्नी ऑपरेशन थिएटर से आई हम उन्हें लेने पहुंच गए और आराम कक्षा तक ले आए। 10 15 मिनट आराम करने के पश्चात, अपना एक थैला और एक बोतल पानी तथा पत्नी का हाथ पकड़ा और कार में रात्रि होने से पहले घर आ गए। यह समझकर की कौन आएगा?
परंतु सभी मरीज इतने खुश नसीब नहीं थे। कुछ अकेले भी गए ।
समय आ गया है कि अस्पताल अकेले जाओ और अकेले आओ क्योंकि अब कोई आपको देखने नहीं आएगा।
परिवार ऐसा टूटा है कि कोई सीमेंट अब इसको जोड़ नहीं सकती।
अपने आप में प्रसन्न रहने का प्रयास करो।
LM