उम्र चालीस की
उम्र चालीस की
होती बड़ी खतरनाक
अकेला कर देती
सबके चेहरे दिखा देती
समझ कुछ ज्यादा आने लगती
बीमारियां सताने लगती
दुनिया भी बेगानी लगती
हाय उम्र ये चालीस की
अनेक शत्रु इस शरीर के
शुगर, थाइराइड, मोटापा
और तो और डिप्रेशन
मन को ना कुछ भी भाए
बिना बात के ही आंसू आए
चिड़चिड़ापन क्यूं बढ़ता जाए
बचपना जाता नहीं
समझदारी आती नहीं
बैरी जवानी जो
बिना पूछे खिसकी जाए
बुढ़ापा दस्तक देने आए
करे तो क्या करे हाय
इससे तो बच्चे ही अच्छे थे
सच से अनजान ही अच्छे थे
समझदारी ने तो रिश्ते छीन लिए
मुखौटे सबके उतर गए
कुछ अपने दिल से उतर गए
बड़ी मुश्किल है डगर
हाय उम्र ये चालीस की
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डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली