Hindi Quote in Poem by Vandna Sharma

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संवेदनाएँ कहाँ खो गई आज
कविता

संवेदनाएँ कहाँ खो गई आज,
मानवता शर्मसार हो रही आज।
जिंदगी इतनी सस्ती हो गई,
काँपते नहीं हाथ, हथियारे के आज।

सहनशक्ति, धैर्य कहीं खो गए,
जरा सी बात पर युवक हिंसक हो गए।
रिश्ते सारे बेमानी हो गए,
एक-दूसरे की जान के दुश्मन हो गए।

ये आज का भारत है सोचो जरा,
हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए।
इंसान आज इंसान से डरने लगा,
प्यार-वफा शब्द झूठा लगने लगा।

बच्चे बड़ों को आँख दिखाने लगे,
बूढ़े आज बच्चों से घबराने लगे।
ना वो रिश्ते रहे ना वो प्यार,
प्यार के नाम पर धोखा देने लगे।

भरोसा करे भी तो कैसे किसी पर,
अपने ही आज पीठ पर खंजर चलाने लगे।
तमाशा देखते रहते हैं लोग,
करते नहीं सहायता किसी की।

झूठे आँसू दिखाने लगे,
मोबाइल ने खा लिया मासूम बचपन।
बच्चे आज बदमाशी गाना गाने लगे।

--- डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर नई दिल्ली

Hindi Poem by Vandna Sharma : 112028669
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