जरूरत बड़ी होती है
कड़वा सच ये है दुनिया का,
'जरूरत' ही सबसे बड़ी होती है।
मतलब निकलने पर भुला देते हैं लोग,
सर्दी में धूप अच्छी लगती है,
यही धूप गर्मी में बड़ी चुभती है है।
सर्दी में पंखों को कोई नहीं पूछता,
गर्मी होते ही इनकी याद आ जाती है।
भरा हो पेट तो पकवान भी अच्छे नहीं लगते,
भूख जब सताए तो
सूखी रोटी भी बड़ा स्वाद देती है।
गुणों की नहीं, धन की कदर होती है यहाँ,
गरीब की तो किसी को याद नहीं आती है।
कौन दोस्त, कैसे रिश्ते, सब दिखावा है,
हो जरूरत तभी किसी की याद आती है।
जो समय पर ना मिले, व्यर्थ है,
समय बीत जाने पर
अनमोल चीज भी बेकार होती है।
जब तक स्वास्थ्य अच्छा है,
दुनिया घूम लीजिए।
लाठी हाथ में लेकर थके शरीर से,
कहाँ दुनिया की सैर होती है?
छोड़ कर, सभी गिले शिकवे,
जिंदगी जी लीजिए
हर किसी को कहाँ,
जिंदगी आसान होती है।
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली