मेरे अल्फ़ाज़...!
एक एक हर्फ़, किसी की कहानी कहती है,
कई इबारते जिसमें छुप कर रहती है।।
मिलते कितने लोग इसके हर मोड़ पर,
लहर दर लहर जो हवा में बहती रहती है।।
पेड़ से झंडे पत्तों के मानिंद,
बिखरे रहते ये मेरी कॉपी के ओर-छोर पर।।
या फिर मैं खुद ही टाक देती इन्हें,
करीने से पन्नों के पोर पोर पर।।
By. Santoshi "Katha"
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