"हुनर दिल तोड़ने का"
ये हुनर कहाँ से सीखा है तुमने,
किसी दिल को इतनी आसानी से तोड़ जाने का।
हमसे तो एक ख़्वाब भी बदला नहीं जाता,
और तुम तजुर्बा लिये हो पल भर में बदल जाने का।
सोचा न था इतनी वफ़ा दोगे तुम हमें,
कि तुम हक़ ही छीन लोगे हम से मुस्कुराने का।
-MASHAALLHA