ये कैसा जादू किया है तुमने, कि होश अपने गंवा रहे हैं,
तुम्हीं को सोचें, तुम्हीं को चाहें, तुम्हीं में खुद को भुला रहे हैं।
न जाने कैसा असर है ये, कि नजर में चेहरा है बस तुम्हारा,
हजारों चेहरे हैं इस जहां में, मगर हम तुमको ही पा रहे हैं।
ये धड़कनें भी बदल गई हैं, जो तुमसे मिलकर धड़क रही हैं,
जो राज़ दिल में छुपाए रखे, वो आज सबको बता रहे हैं।
तुम्हारी महफ़िल, तुम्हारा कूचा, बस यही अब हमारा घर है,
कदम हमारे कहीं भी जाएं, मगर तुम्हारी तरफ ही आ रहे हैं।
ये इश्क है या कोई तिलिस्म है, न तुम ही समझो न हम ही जानें,
कि तुमको पाकर हम आज अपनी, उदास दुनिया सजा रहे हैं।