जमानें की रस्मों को तोड़कर आई थी तुम
तोहफा मुस्कुहटों का लाई थी तुम
हमें तब से कुछ हो गया
जब पहली दफा मुस्कुराई थी
थे तनहा से हम जमानें में
जमाना जला जब नजदिक आई थी तुम
कोई अजाब न मुझको परेशां करें
ये दुआ लब पे लाई थी तुम
जल रहे थे हम जिस वक्त धुप में
मेरी छाँव बनकर आई थी तुम