मैं और मेरे अह्सास
जुबाँ तक पहुंची
प्यार है आँखों में साफ़ दिखाई देता हैं l
बारहा एसा कुछ नहीं है सफाई देता हैं ll
दिल में छुपी हुईं बात जुबाँ तक पहुंची l
चले आओ चले आओ सुनाई देता हैं ll
वादा करते है ताउम्र साथ निभाएंगे l
मोहब्बत की क़सम देकर दुहाई देता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह