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Sp Singh

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@spsingh


"राष्ट्र प्रेम की गूंज"

जो राष्ट्र हमारा भू स्थल,
वो राष्ट्र हमारी शान हैं।
उस राष्ट्र से ही आन है,
वो राष्ट्र ही पहचान है।

जो राष्ट्र के अपने हो न सका,
वो राष्ट्र द्रोही कहलाएगा।
जिस भूमि पर जन्म लिया,
क्या घात उसी से कर जायेगा।

राष्ट्र प्रेमी ही यारों,
जग में सम्मान पाते हैं।
स्वराष्ट्र से घृणा करने वाले,
देश द्रोही कहलाते है।

राष्ट्र प्रेमी है हम यारों,
देश भक्त कहलाते हैं।
स्वराष्ट्र की रक्षा के खातिर,
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।
हम प्राण त्याग कर जाते हैं।।

~ Poet :- Sp Singh

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"सपनों की लौ"

आंखों में एक स्वप्न लिए,
रोज प्रखर निखरता हु।
सूरज सा चमक पाने के खातिर,
सूरज सा रोज मै जलता हु।

सूरज जैसा ना सही पर,
रौशनी मैं लाऊँगा।
सूरज सा चमक नहीं होगी  पर,
अंधियारा को मिलाऊंगा।

सूरज जैसा गुण हो मेरा,
सूरज सा ही धर्म हो।
सूरज सा दानी बनू और,
सूरज जैसा कर्म हो।

सूरज सा प्रखर निखरकर मैं,
सूरज का मान बढ़ाऊंगा।
सूरज का अंश मात्र भी हो तो,
जग को रौशन कर जाऊंगा।
जग को रौशन कर जाऊंगा।।

                     ~ Poet :- Sp Singh

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