Hindi Quote in Poem by Chandervidya urf Rinki

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कविता

एक लट जो बिखर जाती है तुम्हारे ललाट पर,
पानी से भीगे तुम्हारे मस्तक पर कुछ बूंदें मोतियों-सी दमकतीं।

अधरों पर अनायास ही कुछ शब्द लपके,
मगर फिर खुलकर चुप हो गए।
मुझे लगा तुम कुछ कहोगी,
मगर शब्दों की पहली आहट भीतर ही रह गई।

तुम कह नहीं पाती हो,
लेकिन मैंने देखा है तुम्हारी आँखों का कहना,
और सीख लिया है उनमें बह जाना।
सच कहूँ तो सीखा नहीं,
मगर जब डूब जाता हूँ और हाथ-पाँव चलाता हूँ,
तो तैरते हुए तुम्हारी आँखों से दिल को समझने की कोशिश करता हूँ।

मुझे लगा था—स्त्रियाँ उलझी होती हैं,
मगर तुम भावुक हो और मासूम।
कठोर हो सुरक्षा के लिए,
कोमल हो ममता से भरी।

तुम्हारे भीतर है प्यार सबके लिए,
इसलिए समझ पाना तुम्हें शायद मुश्किल रहा
मगर आसान तो कुछ भी नहीं।

तुम बहल जाती हो मीठी दो-टूक बातों से,
समेट लेती हो, संवार लेती हो हर काम इन दो हाथों से।
पल्लुओं में संसार समेटे, मोह-पाश का आधार समेटे

तुम चल देती हो एक मुस्कान लिए,
मैंने लाखों हृदय थाम लिए।

#स्त्रीएवंस्त्रीत्व #अनकही_सी_बात ✍️चंद्रविद्या उर्फ रिंकी

Hindi Poem by Chandervidya urf Rinki : 112024296
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