मैं और मेरे अह्सास
नज़ारा
दिल बहला सके एसा कोई नज़ारा नहीं मिला l
दो लम्हें जी सके खुशी का इशारा नहीं मिला ll
जिंदगी भर दिल में हमेशा से शिकायत रही l
पूरा समंदर घूम लिया कही किनारा नहीं मिला ll
इलाज - ए - दर - ओ - दिल का क्या करे अब l
रातभर ढूँढते रहे आसमाँ में सितारा नहीं मिला ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह